गलवां घाटी के बाद अब पैंगोंग झील क्षेत्र में चीन तेजी से सैन्य तैनाती बढ़ाकर कब्जे की कोशिश में जुटा है।
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गलवां घाटी के बाद अब पैंगोंग झील क्षेत्र में चीन तेजी से सैन्य तैनाती बढ़ाकर कब्जे की कोशिश में जुटा है। ताजा सैटेलाइट तस्वीरों ने झील के फिंगर चार से आठ तक चीनी सेना के जमावड़े की पोल खोल दी है, जिसमें काफी तादाद में वाहन, तंबू, नौकाएं और स्थायी बंकर दिखाई दे रहे हैं।
तस्वीरों के आधार पर जानकारों का कहना है कि ड्रैगन की यह भारी तैनाती गलवां से कहीं ज्यादा है। वह भारतीय गतिविधियों पर नजर रखने के लिए फिंगर 4 की चोटी पर काबिज होने के लिए सबसे ज्यादा जोर लगा रहा है। इलाके में चीन की बढ़ती मौजूदगी पर भारतीय सैन्य अधिकारियों का कहना है कि वह पूर्वी लद्दाख में यथास्थिति बदलने की कोशिश कर रहा है। यही वजह है कि किसी भी स्थिति का सामना करने के लिए भारत ने भी फिंगर 4 समेत अन्य इलाकों में पर्याप्त तैनाती बढ़ा दी है।
भारत ने नए पोस्ट बनाए आईटीबीपी कैंप मजबूत...
सैन्य सूत्रों का कहना है कि चीन के खिलाफ भारत ने भी तेजी से मोर्चेबंदी की है। चीनी किसी भी दिशा से आगे आए तो उन्हें वहीं मजबूत जवाब दिया जाएगा। फिंगर 4 की चोटी के पश्चिम में भारत ने नई पोजिशन स्थापित की है वहीं दो किमी में स्थित आईटीबीपी कैंप को भी मजबूत किया है। चोटी पर चीनी तैनाती अब भारतीय क्षेत्र से आधा किमी से कम दूरी पर सीधी नजर आती है।
जंग में चीन ने इसी रास्ते के जरिये किए थे हमले
एलएसी का अधिकांश हिस्सा जमीनी है लेकिन यह झील ही ऐसी जगह है, जहां पानी में भी सीमा खिंची हुई है। पैंगोंग झील चुशुल के रास्ते में पड़ती है, जिसका इस्तेमाल चीन भविष्य में भारतीय क्षेत्र पर हमले के लिए कर सकता है। 1962 की जंग में चीन ने इसी रास्ते के जरिये भारत में हमले शुरू किए थे।
इस इलाके में लंबे टकराव की आशंका...
पैंगोंग झील में ताजा तनाव को जानकार एक अर्द्धस्थायी टकराव (सेमी-परमानेंट फेस-ऑफ) के तौर पर देख रहे हैं। सेना के मुताबिक मौजूदा स्थिति कई हफ्तों तक खिंच सकती है।
पिछले 10 दिनों की सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण से पता चला है कि फिंगर 4 की चोटी पर न केवल चीनी तंबू, कैंप बल्कि हथियारों के स्थायी बंकर और सुरक्षा पटरियां भी दिखी हैं।
तीन साल पहले भी हुई भिड़ंत
पैंगोंग त्सो के किनारे अक्सर विवाद होता रहा है। इसके किनारे अगस्त 2017 में भी भारत-चीन के सैनिकों में हाथापाई हुई थी। पत्थरबाजी, लाठी-डंडे और स्टील रॉड चलने से कई सैनिक घायल हुए थे।
किनाराें पर सड़कों का मजबूत चीनी जाल...
चीन ने पैंगोंग के आसपास मजबूत सैन्य इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा कर लिया है। झील के किनारों पर मजबूत सड़कें बना ली हैं। 1999 के कारगिल युद्ध में जब भारतीय टुकड़ी यहां से ऑपरेशन विजय के लिए निकली तो चीन ने पीछे से भारतीय सीमा में झील किनारे पांच किमी लंबी सड़क बना ली थी।
कारगिल युद्ध के वक्त किए कई निर्माण
चीन की कई सड़कें जी219 काराकोरम हाईवे तक जाती हैं। सड़कों की स्थिति को देखते हुए झील के उत्तरी हिस्से में चीन ने भारत के मुकाबले बढ़त बना रखी है।
दो तिहाई हिस्सा चीन एक तिहाई भारत के पास
- लद्दाख में 14 हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित यह लंबी, संकरी और गहरी झील तिब्बत से भारतीय क्षेत्र तक फैली है। यहां भारत-चीन सेना लगातार गश्त करती हैं।
- सका पूर्वी हिस्सा तिब्बत में है और यह 135 किमी लंबी है। इसकी सबसे ज्यादा चौड़ाई 6 किलोमीटर तक है।
- 89 किलोमीटर यानी करीब 2 तिहाई हिस्से पर चीन का नियंत्रण है।
- पश्चिमी हिस्से में 45 किमी यानी एक तिहाई हिस्से पर भारत का नियंत्रण है।
घूमने के लिए इनर लाइन परमिट जरूरी
भारत में 1999 तक पर्यटकों को पैंगोंग झील जाने की इजाजत नहीं मिलती थी। आज भी वहां घूमने के लिए लेह का इनर लाइन परमिट लेकर जाना होता है।