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भारत-चीन सीमा पर कैफे डिप्लोमेसी: अरुणाचल के आखिरी गांव में सेना ने जर्जर पुल को बनाया बॉर्डर ब्रू कैफे

सार

भारत-चीन सीमा के नजदीक अरुणाचल प्रदेश के तवांग जिले के जेमिथांग घाटी स्थित एक दूरस्थ गांव में भारतीय सेना और बीआरओ ने मिलकर एक निष्क्रिय बैली ब्रिज को महज 31 दिनों में पुनर्विकसित कर 'बॉर्डर ब्रू कैफे' के रूप में बदल दिया।  
 
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बॉर्डर कैफ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अरुणाचल प्रदेश के तवांग जिले में एलएसी के बेहद करीब भारतीय सेना और सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने कैफे डिप्लोमेसी की एक अनोखी मिसाल पेश की है। जेमिथांग घाटी के एक सुदूर गांव में एक पुराने और जर्जर बेली ब्रिज को महज 31 दिनों में पुनर्विकसित कर बॉर्डर ब्रू कैफे का रूप दे दिया गया है। यह कैफे अब न केवल सामरिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि पर्यटकों और बाइकर्स के लिए आकर्षण का नया केंद्र बन गया है।

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देश का पहला गांव और रणनीतिक पहल
जेमिथांग को भारत का पहला गांव कहा जाता है। रणनीतिक रूप से संवेदनशील इस इलाके में जर्जर पुल को एक जीवंत सोशल हब में बदलना केवल पर्यटन विकास नहीं, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों में सामुदायिक सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है। भारत-चीन सीमा के पास बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देना लंबे समय से एक चुनौती रही है, जिसे अब इस तरह की नवाचारी पहलों के जरिये हल किया जा रहा है।

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वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम का हिस्सा

यह परियोजना सेना के ऑपरेशन सद्भावना और केंद्र सरकार के वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसका मुख्य उद्देश्य सीमावर्ती गांवों में विकास, पर्यटन और आजीविका के अवसर बढ़ाना है। जो पुल कभी अनुपयोगी था, वह अब एक आर्थिक केंद्र बन चुका है।

स्थानीय महिलाओं के हाथ में कमान
बॉर्डर ब्रू कैफे का संचालन स्थानीय मोनपा समुदाय की महिलाओं का एक समूह कर रहा है। यह पहल उन्हें न केवल रोजगार दे रही है, बल्कि पर्यटन गतिविधियों में उनकी भागीदारी भी सुनिश्चित कर रही है। यहां आने वाले पर्यटक हिमालय की वादियों के बीच स्थानीय मोमोज और कॉफी का आनंद लेते हुए मोनपा संस्कृति को करीब से समझ पा रहे हैं।
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पर्यटन और सामरिक मजबूती: सेना
पूर्वी कमान के सेना कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल आरसी तिवारी ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे सीमावर्ती समुदायों को सशक्त बनाने का बेहतरीन उदाहरण बताया है। भारतीय सेना के अनुसार, ऐसी परियोजनाएं स्थानीय लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाती हैं और पर्यटन को बढ़ावा देती हैं। सामरिक और सामाजिक दृष्टिकोण से यह कैफे भारत-चीन सीमा पर एक सॉफ्ट पावर के रूप में उभर रहा है।

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