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चीन के साथ काफी गहरी हैं विवाद की जड़ें, 'OBOR' है भारतीय PM के जोरदार स्वागत की वजह

Fri, 27 Apr 2018 08:54 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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दुनिया की दो सबसे पुरानी सभ्यताओं का प्रतिनिधित्व करने वाले भारत और चीन के बीच विवादों की फेहरिस्त काफी लंबी है और उनकी जड़ें काफी गहरी हैं। भारत के मुकाबले चीन की अर्थव्यवस्था पांच गुना बड़ी है, इसलिए वह इस क्षेत्र में दबदबा जमाना चाहता है। वह भारत के दुश्मन पाकिस्तान को अपनी गोद में पाल रहा है। यही नहीं, श्रीलंका, नेपाल, बांग्लादेश और मालदीव जैसे देशों में निवेश के जरिए उन पर भारत के असर को कम करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है। पेश है दोनों देशों के बीच विवादों और मुद्दों पर एक नजर:
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सीमा पर चीन की दादागीरी

दोनों देशों के बीच 3500 किमी लंबी सीमा है जिसको लेकर विवाद है। भारत के राज्य अरुणाचल प्रदेश के 90 हजार वर्ग किमी के इलाके पर चीन अपना दावा करता रहा है। वहां के लोगों को नत्थी वीजा जारी कर वह इसे हवा देता रहता है। गाहे-बगाहे उसके सैनिक अरुणाचल प्रदेश में घुस जाते हैं। इसके अलावा अक्साई चीन के 38 हजार वर्ग किमी क्षेत्र को चीन दबाए बैठा है। लगभग एक साल पहले चीन ने दोकलम के पठार में सड़क बनाने की कोशिश कर एक बड़े तनाव को जन्म दिया था जो दोनों पक्षों की सूझबूझ से युद्ध में तब्दील होते-होते रह गया। दोनों देशों की सेना 73 दिन तक आमने-सामने डटी रहीं थीं।

भारत की एनएसजी सदस्यता का विरोध

दुनिया भर में परमाणु ईंधन की बिक्री पर नियंत्रण रखने वाले 48 देशों के न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप (एनएसजी) में भारत के प्रवेश का चीन लगातार विरोध करता रहा है। उसका कहना है कि भारत ने अभी तक परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, इसलिए उसे एनएसजी की सदस्यता नहीं दी जा सकती है। चीन के उकसावे पर पाकिस्तान ने भी एनएसजी की सदस्यता का आवेदन कर दिया है जबकि दुनिया यह बखूबी जानती है कि परमाणु हथियारों को लेकर पाकिस्तान का रवैया कितना गैर-जिम्मेदाराना है।
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हिंद महासागर में दखलंदाजी

चीन हिंद महासागर में अपनी दखलंदाजी लगातार बढ़ा रहा है। उसके प्रभाव को कम करने के लिए अमेरिका ने भारत, जापान और आस्ट्रेलिया के साथ मिलकर एक गठबंधन बनाने की पेशकश की है। चीन को चिढ़ाने के लिए अमेरिका ने एशिया-पेसिफिक की जगह इंडो-पेसिफिक शब्दावली का प्रयोग करना शुरू कर दिया है। चीन की पूरी कोशिश है कि भारत इस गठबंधन में शामिल न हो।  

आतंकवाद पर दोहरा रवैया

चीन खुद आतंकवाद की समस्या झेल रहा है। उसके शिनजियांग प्रांत में उइगर आतंकवादियों ने उसकी नाक में दम कर रखा है, लेकिन जब आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई की बात आती है तो पाकिस्तान को लेकर उसका दोहरा रवैया बार-बार सामने आता है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा जैश ए मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित करने की कोशिश को वह कई बार अपने वीटो से विफल कर चुका है।  
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वन बेल्ट वन रोड

चीन की महत्वाकांक्षी वन बेल्ट वन रोड (ओबोर) परियोजना दोनों देशों के बीच विवाद की बहुत बड़ी वजह है। भारत ने हाल ही में कहा है कि वह इसके खिलाफ है। दरअसल, इस परियोजना का एक हिस्सा पाक अधिकृत कश्मीर से होकर गुजर रहा है, जिसे भारत अपना अभिन्न अंग मानता है। 

अमेरिका से व्यापार युद्ध

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के खिलाफ व्यापार युद्ध छेड़ दिया है। इसके तहत अमेरिका ने चीन के निर्यात पर 25 फीसदी तक शुल्क बढ़ा दिया है। चीन इससे काफी चिंतित है। अमेरिका के साथ इस व्यापार युद्ध में उसे भारत का साथ चाहिए। खासकर वह भारतीय बाजारों में अपनी पहुंच बढ़ाना चाहता है। हाल के दिनों में भारत ने भी चीन की कई वस्तुओं पर शुल्क में बढ़ोतरी की है और कई तरह की गैर-शुल्कीय बाधाएं खड़ी की हैं। चीन आर्थिक मोर्चे पर भारत के साथ सभी विवादों को निपटाने का इच्छुक है।
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