उद्योग संगठन एसोचैम ने व्यापक सर्वे के बाद दावा किया है कि अगर 15 मुख्य उत्पादों का विनिर्माण घरेलू स्तर पर बढ़ाया जा सके, तो दो-तीन वर्षों में भारत आत्मनिर्भर बन सकता है। देश के आयात बिल में इन उत्पादों की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा होती है।
एसोचैम के मुताबिक, इलेक्ट्रॉनिक्स, कोयला, लौह-इस्पात, नॉन फेरस मेटल और खाद्य तेलों की जरूरतों के लिए भारत काफी हद तक आयात पर निर्भर है। लॉकडाउन के दौरान भी मई में 2.8 अरब डॉलर के इलेक्ट्रॉनिक सामानों का आयात करना पड़ा है। एसोचैम ने कहा, उद्योग जब सामान्य अवस्था में परिचालन करने लगेंगे तो इनका आयात बढ़कर 5 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा, जो विदेशी पूंजी की भारी खपत का कारण है। एसोचैम के महासचिव दीपक सूद ने बताया कि सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों का विनिर्माण बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन योजना शुरू की है।
ये उत्पाद शामिल
ट्रांसपोर्ट उपकरण, मेडिकल और फार्मा उत्पाद, उर्वरक, डाई, रंगरोगन उत्पाद, पेशेवरों के उत्पाद (टूल), चश्मे, फल और सब्जियों के आयात पर भारत को भारी-भरकम राशि खर्च करनी पड़ती है। एसोचैम ने कहा, सरकार को क्रूड पर निर्भरता घटाने के लिए लंबी अवधि की रणनीति पर काम करना होगा। इसके लिए हमें न सिर्फ उत्पादन क्षमता और निवेश बढ़ाने की जरूरत है, बल्कि उपभोक्ताओं तक सस्ते और गुणवत्ता वाले उत्पाद भी पहुंचाने होंगे।