भारत में अमेरिका के राजदूत केनेथ जस्टर का कहना है कि चीन से अपना व्यवसाय समेटने वाली कंपनियों के लिए भारत ‘वैकल्पिक निवेश हब’ बन सकता है। जस्टर ने कहा कि भारत इस मौके अपने पक्ष में भुना सकता है।
जस्टर ने कहा कि कई अमेरिकी कंपनियों ने
चीन में कारोबार करने में बढ़ती मुश्किलों की बात की है। उस हिसाब से कुछ कंपनियां वहां अपने कामकाज को कम कर रही हैं। वहीं अन्य कई कंपनियां बड़ी दिलचस्पी से वैकल्पिक बाजारों की ओर देख रही हैं। ऐसे में भारत एक अच्छा वैकल्पिक निवेश हब बन सकता है।
अमेरिकी राजदूत ने
ट्रंप प्रशासन की अमेरिका फर्स्ट की नीति का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका फर्स्ट नीति और मेक इन इंडिया विरोधाभासी नहीं हैं। इससे दोनों देशों के पास एक दूसरे देश में निवेश करना दोनों देशों के लिए फायदेमंद होगा। जस्टर ने कहा, ‘मैं इस बात को और आगे बढ़ाते हुए यह सुझाव देना चाहता हूं कि हमें आर्थिक संबंधों पर भी वैसा ही ‘रणनीतिक लेंस’ लगाने की जरूरत है, जैसा कि अभी रक्षा संबंधों के साथ हुआ।’
20 अरब से 115 अरब डॉलर तक पहुंचा व्यापार
दोनों देशों के बीच 2001 में 20 अरब डॉलर का व्यापार होता था जो 2016 में बढ़कर 115 अरब डॉलर हो गया। जस्टर ने कहा, ‘निश्चित रूप से, हमे अभी और लंबा रास्ता तय करना है। इसके लिए हमें और जरूरी कदम उठाने की जरूरत है। लेकिन हमें अपने ट्रेड पॉलिसी फोरम का इस्तेमाल रचनात्मक ढंग से करने की जरूरत है। व्यावसायिक वार्ता को बेहतर करने, समझ बढ़ाने और आत्मविश्वास बनाए रखने से ही समस्याओं का हल हो सकता है।