दुनियाभर में क्रिप्टो संपत्तियों को लेकर बहस जारी है। जिस तरह से क्रिप्टो का फैलाव पूरी दुनिया में हुआ है इससे जोखिम भी काफी बढ़ गया है। वहीं भारत और ब्रिटेन ने बुधवार को क्रिप्टो संपत्तियों के संबंध में अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर चर्चा की और इससे जुड़े जोखिमों से निपटने के लिए मजबूत वैश्विक दृष्टिकोण के महत्व पर जोर दिया।
भारत-यूके द्वितीय वित्तीय बाजार संवाद में दोनों देशों के प्रतिभागियों ने अपने संबंधित बैंकिंग क्षेत्रों में हाल के विकास पर अपडेट प्रदान किया, बैंकिंग प्रवृत्तियों और क्षेत्र में उभरती कमजोरियों और जोखिमों पर चर्चा की।
संयुक्त बयान में कहा गया कि आपसी सीख के माध्यम से सेंट्रल बैंकिंग डिजिटल करेंसी (सीबीडीसी) पर ज्ञान बढ़ाने की संभावना तलाशी गई। प्रतिभागियों ने क्रिप्टो संपत्तियों के संबंध में अंतर्राष्ट्रीय विकास, और मजबूत वैश्विक दृष्टिकोण के महत्व और जी20 रोडमैप देने में प्रगति पर चर्चा की।अमेरिकी नियामकों ने बिटकॉइन, ईथर और विभिन्न अन्य क्रिप्टो संपत्तियों को प्रतिभूतियों के रूप में अयोग्य घोषित कर दिया है।
इससे पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि जी20 देशों की क्रिप्टो संपत्तियों पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि अर्थव्यवस्थाओं को नुकसान से बचाते हुए संभावित लाभों को सुनिश्चित करने के लिए प्रतिक्रिया सुनिश्चित करनी चाहिए। आगे उन्होंने कहा कि जी20 नीति और नियामक ढांचे के प्रमुख तत्वों को सामने लाने में आईएमएफ और वित्तीय स्थिरता बोर्ड के काम को स्वीकार करता है। साथ ही वित्त मंत्री ने कहा कि एक सिंथेसिस पेपर जो क्रिप्टो संपत्ति के व्यापक आर्थिक और विनियामक दृष्टिकोण को एकीकृत करेगा, उसकी आवश्यकता है।