मोदी सरकार द्वारा 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद सौदे पर विपक्ष लगातार हमलावर है। 2019 लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस इस मुद्दे पर भाजपा को करारी शिकस्त देने की फिराक में नजर आ रही है।
राफेल पर कांग्रेस का कहना है कि यह मोदी सरकार और रिलायंस समूह के प्रमुख अनिल अंबानी के बीच हुआ सौदा है। सरकार ने फ्रेंच विमानन कंपनी दसॉल्ट से लड़ाकू विमान खरीदें हैं। हालांकि यह पहला मौका नहीं है जब भारतीय सेना के बेड़े में इस कंपनी के विमान को शामिल किया गया हो।
अतीत में कई लड़ाकू विमानों की भारत को आपूर्ति दसॉल्ट एविएशन द्वारा की गई है। इनमें टोफानी, मिस्टेर IV, जगुआर और मिराज 2000 जैसे खतरनाक विमान शामिल हैं।
आइए जानते हैं उन विमानों के बारे में जिनकी आपूर्ति दसॉल्ट भारत को कर चुका है:-
टोफानी: भारत ने दसॉल्ट को अपना पहला ऑर्डर 1953 में टोफानी लड़ाकू विमान के लिए दिया था। मार्च 1954 में भारत को इनकी आपूर्ति की गई थी। 1961 में 'गोवा मुक्ति' अभियान और 1962 में चीन-भारत युद्ध के दौरान इनका इस्तेमाल दुश्मनों के खिलाफ किया गया था।
मिस्टेर IV ए: 1957 में भारतीय वायु सेना (आईएएफ) ने एक बड़ा विस्तार देखा जब 104 मिस्टेर IV ए जंगी जहाज को सेना में शामिल किया गया। ये आईएएफ में शामिल होने वाले पहले 'सुपरसोनिक-इन-ए-डाइव' विमान थे। इनका इस्तेमाल पाकिस्तान के साथ युद्ध के दौरान जमीन पर हमले करने के लिए किया गया था। सेना में इनका इस्तेमाल 1973 तक किया गया।
जगुआर: 1978 में आईएएफ ने 40 जगुआर के लिए आदेश दिया और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) में 120 जगुआर विमान बनाने का लाइसेंस भी प्राप्त कर लिया था। आईएएफ को जुलाई 1979 में अस्थायी रूप से पहले दो जगुआर प्राप्त हुए थे। इसके बाद एचएएल में अपनी खुद का उत्पादन शुरू कर दिया था।
वायु सेना की प्रौद्योगिकी वेबसाइट का कहना है कि 40 जगुआर के दूसरे बेड़े की डिलीवरी 1981 में शुरू हुई थी। जबकि 45 विमानों तीसरे बेड़े को मई 1981 में शामिल किया गया था। इसके बाद आईएएफ ने 1999 में 17 और 2001 और 2002 के बीच 20 और जगुआर को अपने बेड़े में शामिल किया।
मिराज-2000: आईएएफ ने 1982 और 1986 में 42 सिंगल सीट (एच) और 7 ड्यूल सीट (TH) मिराज-2000 विमान का ऑर्डर दिया था। जिसके बाद एकबार फिर साल 2000 में 10 और 4 एच और 6 टीएच विमानों का ऑर्डर दिया गया। बता दें कि मिराज वही विमान है जिसने कारगिल युद्ध के दौरान अपनी क्षमता सिद्ध की थी।