करीब ढाई साल के बाद भारत-भूटान सीमा पर स्थित जयगांव गेट खोल दिया गया। करोना महामारी के चलते यह गेट बंद कर दिया गया था। शुक्रवार सुबह से ही लोग गेट के खुलने का इंतजार कर रहे थे। हल्की बारिश के बीच इसे विधि-विधान के साथ खोला गया, तो लोग भावुक हो गए। भूटान के प्रधानमंत्री लोटे शेरिंग ने बौद्धिक परंपरा के अनुसार पूजा-पाठ करने के बाद इस नए प्रवेश की घोषणा की। इस गेट के खुलने का कई संस्थाओं ने स्वागत करते हुए गुब्बारे उड़ाकर खुशी का इजहार किया।
इस अवसर पर भूटान के प्रधानमंत्री लोटे शेरिंग ने कहा, कोरोना के समय नागरिकों की सुरक्षा चलते यह जो गेट पिछले 30 महीनों से बदं था, उसे आज खोल दिया गया। अब लोग भूटान आ-जा सकते हैं। जैसा पहले था, लोग भूटान के फुंशोलिग शहर में निशुल्क आ-जा सकते हैं, लेकिन उनको रात को वापस भारत लौटना होगा।
अगर वे रात को रूकते हैं तो उन्हें भूटान के पर्यटन नियम के अनुसार 1200 रुपये का भुगतान करना होगा। वहीं भूटान के दूसरे शहर जाने के लिए पर्यटकों को टूरिस्ट रजिस्ट्रेशन करवाना होगा और उसके लिए 1200 रुपये का भुगतान करना होगा। भूटान प्रवेश के लिए लोग ऑनलाइन रेजिस्ट्रेशन कर सकते है। उन्हें भूटान के भीतर प्रवेश के समय अपना वोटर कार्ड या पासपोर्ट रखना अनिवार्य है। इसी तरह बच्चों के लिए जन्म प्रमाणपत्र अनिवार्य है।
गेट खोले जाने के समय दोनों तरफ से काफी संख्या में लोग मौजूद थे। दोनों ओर भूटान में प्रवेश करने वाले और भूटान से भारत आने वाले लोगों का स्वागत किया गया। वहीं भूटान से बाहर जयगांव आते ही लोग भावुक हो गए। भूटान और जयगाव का काफी पुराना संबंध हैं। कोरोना के चलते वे आवाजाही नहीं कर पा रहे थे। गेट खुलने पर जयगांव मर्चेंट एसोसिएशन सहित कई व्यापारिक और सामाजिक संस्थाओं ने इसे एतिहासिक दिन बताया। सभी लोग इस दिन का इंतजार कर रहे थे। इस दौरान कई संस्थाओं ने गुब्बारे उड़ाकर खुशी का इजहार किया।