अमेरिका का बुलावा आ रहा है। 23-24 अप्रैल को जलवायु शिखर सम्मेलन में दक्षिण एशिया से भारत, भूटान, बांग्लादेश इसमें हिस्सा लेंगे, लेकिन पाकिस्तान को न्यौता नहीं दिया गया है। इस सम्मेलन में दुनिया के 40 देश शिरकत करेंगे, लेकिन इसमें पाकिस्तान का न होना चौंका रहा है। जलवायु परिवर्तन पर भारत का रुख जानने और औपचारिकता पूरी करने के लिए राष्ट्रपति के विशेष दूत के रूप में जॉन कैरी 1-9 अप्रैल के बीच भारत भी आएंगे। कैरी अबू धाबी और ढाका भी जाएंगे। अमेरिका की इस नीति ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। संदेश भी है कि क्या उसके लिए पाकिस्तान की अहमयित खत्म हो रही है?
यह शिखर सम्मेलन वर्चुअल तरीके से होगा। इसमें चीन, रूस, फ्रांस, आस्ट्रेलिया, जर्मनी, कनाडा, जापान, इस्राइल, इटली, चिली, जमैका समेत तमाम होंगे। लेकिन पाकिस्तान को इसमें शामिल होने का न्यौता नहीं मिला है। कहा जा रहा है कि अमेरिका ने जलवायु शिखर सम्मेलन में अपने करीबी, दुनिया में जलवायु परिवर्तन के प्रति संवेदनशील, बड़े पैमाने पर प्रदूषण फैलाने वाले और अहम देशों को आमंत्रित किया है। इससे पहले भी इस तरह के सम्मेलन में पाकिस्तान की भागेदारी रही है। लेकिन इस बार दक्षिण एशिया से उसे अभी तक बाहर रखा गया है।
पाकिस्तान में भी अमेरिका द्वारा उनके देश को नजरअंदाज करने को लेकर तीखी प्रतिक्रिया आ रही है। पाकिस्तान के मीडिया हाऊस और राजनयिक भी जो बाइडन प्रशासन के निर्णय से हैरान हैं। उन्हें लग रहा है कि अमेरिका ने ऐसा करके उनके देश की अहमियत को घटाने का संदेश दिया है। यह पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के लिए भी बड़े झटके के तौर पर देखा जा रहा है।