भारत और भूटान के बीच न्यायिक रिश्तों को नया आयाम देने के लिए एक समझौता हुआ है। सीजेआई सूर्यकांत ने बताया कि इसके तहत भूटान के दो विधि लिपिक तीन महीने के लिए भारतीय सुप्रीम कोर्ट में काम करेंगे। इसका पहल का मकसद दोनों देशों में कानूनी सहयोग बढ़ाना है।
भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने सोमवार बताया कि भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने भूटान के सर्वोच्च न्यायालय के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के युवा कानूनी पेशेवरों के बीच आदान-प्रदान को सुगम बनाना है। अदालती कार्यवाही के शुरूआत में सीजेआई ने बताया कि इस समझौते के तहत भूटान के दो विधि लिपिक तीन महीने की अवधि के लिए भारतीय सुप्रीम कोर्ट में काम करेंगे।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इन क्लर्कों को भारतीय विधि लिपिकों के समान ही मानदेय दिया जाएगा और उनके यात्रा खर्च का वहन भी सुप्रीम कोर्ट ही करेगा। खचाखच भरे कोर्टरूम में इन क्लर्कों का परिचय कराते हुए सीजेआई ने उन्हें "युवा और मेधावी" बताया। उन्होंने कहा कि उन्हें अपने कार्यकाल के दौरान अलग-अलग अदालतों में काम सौंपा जाएगा।
सीजेआई ने कहा, "हमने भूटान के सुप्रीम कोर्ट के साथ एक समझौता किया है, जिसके आधार पर दो विधि लिपिक हमारे साथ जुड़ेंगे। वे तीन महीने तक यहां रहेंगे और अलग-अलग अदालतों में काम करेंगे। दोनों ही बहुत होशियार हैं।" उन्होंने कहा इस पहल का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच न्यायिक सहयोग को मजबूत करना और संस्थागत संबंधों को और गहरा बनाना है।