भारतीय विदेश व्यापार महानिदेशालय ने बड़ा फैसला लेते हुए बांग्लादेश से जूट उत्पादों के जमीन के रास्ते आयात पर रोक लगा दिया है। अधिसूचना में साफ कहा गया है कि अब इन जूट उत्पादों का जमीनी रास्तों से आयात अनुमति योग्य नहीं होगा।
भारत सरकार ने शुक्रवार को बांग्लादेश से कुछ खास जूट उत्पादों और बुने हुए कपड़ों के जमीनी रास्तों से आयात पर रोक लगा दी है। अब ये सामान सिर्फ समुद्री रास्ते से – महाराष्ट्र के न्हावा शेवा बंदरगाह के जरिए ही भारत में आ सकेगा। विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने इस संबंध में एक अधिसूचना जारी की है। इसमें साफ कहा गया है कि अब इन जूट उत्पादों का जमीनी रास्तों से आयात अनुमति योग्य नहीं होगा।
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पहले कई खाद्य सामग्री के आयात पर लगी थी पाबंदी
इससे पहले 17 मई को भारत ने बांग्लादेश से तैयार कपड़ों और प्रोसेस्ड खाद्य सामग्री जैसे कुछ उत्पादों के आयात पर भी बंदरगाह आधारित पाबंदी लगाई थी।
जमीनी रास्तों से नहीं लाए जा सकेंगे ये सामान
इस नई रोक के तहत जिन वस्तुओं को जमीनी रास्तों से नहीं लाया जा सकेगा, उनमें जूट से बने उत्पाद, सिंगल फ्लैक्स यार्न (एक धागे वाला जूट), मल्टीपल फोल्डेड यार्न (कई धागों वाला जूट), जूट से बनी बुनी हुई चादरें, अनब्लीच्ड (बिना ब्लीच किए) जूट के बुने कपड़े शामिल हैं।
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क्यों लगाई गई यह रोक?
हालांकि विदेश व्यापार महानिदेशालय की अधिसूचना में कारण स्पष्ट नहीं बताया गया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारतीय जूट उद्योग को संरक्षण मिलेगा, सीमा पार से हो रहे अनुचित व्यापार पर अंकुश लगेगा और गुणवत्ता नियंत्रण आसान होगा।
अब आयातक कंपनियों को अगर बांग्लादेश से इन उत्पादों को भारत लाना है, तो उन्हें न्हावा शेवा बंदरगाह के जरिए ही यह प्रक्रिया करनी होगी। जमीनी बॉर्डर जैसे पश्चिम बंगाल के सीमा रास्तों से इन सामानों को लाना पूरी तरह निषिद्ध होगा। यह फैसला भारत और बांग्लादेश के बीच व्यापार संबंधों में एक अहम बदलाव माना जा रहा है, खासकर पूर्वी भारत के जूट उद्योग के हितों की दृष्टि से।