कोरोना काल में डॉल्फिन की आबादी और उनके स्वास्थ्य पर कोरोना के प्रभाव का आकलन करने के लिए भारत, बांग्लादेश, म्यांमार, नेपाल के डॉल्फिन संरक्षण में लगे विशेषज्ञ एकजुट हुए। उन्होंने इनकी वर्तमान स्थिति और भविष्य में इनके संरक्षण की रणनीति पर चर्चा की।
यह सभी विशेषज्ञ मंगलवार को दिल्ली में हुए इनलैंड फिशरीज सोसाइटी ऑफ इंडिया, आईसीएआर केंद्रीय समुद्री मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान, राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी), प्रोफेशनल फिशरीज ग्रेजुएट्स फोरम (पीएफजीएफ) और एक्वाटिक इकोसिस्टम हेल्थ एंड मैनेजमेंट सोसाइटी द्वारा आयोजित वेबिनार में शिरकत कर रहे थे।
प्रोजेक्ट टाइगर की तर्ज पर होगा इनका संरक्षण
डॉल्फिन विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना काल के लॉकडाउन के दौरान डॉल्फिन की बढ़ी गतिविधियों ने साबित कर दिया की यदि इन्हें अनुकूल वातावरण दे दिया जाए तो इनका संरक्षण आसान है। डीजी मत्स्य विज्ञान, आईसीएआर डॉ. जेके जेना ने कहा कि अशांति और हस्तक्षेप को कम करने से डॉल्फिन अपने आप से फल-फूल सकती हैं और यही हमने लॉकडाउन के दौरान देखा है।
वहीं इस मौके पर इस अवसर पर एनएमसीजी के महानिदेशक राजीव रंजन मिश्रा ने कहा उनका लक्ष्य गंगा के कायाकल्प में डॉल्फिन संरक्षण को जोड़ना है। उन्होंने कहा पर्यावरण मंत्रालय द्वारा हाल में प्रधानमंत्री के माध्यम से प्रोजेक्ट डॉल्फिन की घोषणा की गई है। यह परियोजना प्रोजेक्ट टाइगर के अनुरूप होगी ।