गंगोत्री से गंगासागर तक का लगे 53 दिन
समापन समारोह में बताया गया कि 53 दिनों की इस अभूतपूर्व रोमांचक यात्रा 2 नवंबर, 2024 को गंगोत्री से आरंभ हुई थी। 2,500 किलोमीटर की यात्रा के दौरान मार्ग में आने वाले शहरों और गांवों में महिला सशक्तिकरण और स्वच्छ निर्मल गंगा का संदेश देते हुए 22 दिसंबर 2024 को यह यात्रा के आखिरी पड़ाव गंगा सागर पहुंची, जहां सभी महिला रिवर राफ्टर ने वहां स्थित प्रसिद्ध कपिल मुनि के मंदिर मे पूजा-अर्चना की। इसके बाद टीम काकद्वीप से वापस नदी के रास्ते डायमंड हार्बर आई, जहां बीएसएफ के महानिदेशक और बीएसएफ के पूर्वी कमान के अतिरिक्त महानिदेशक रवि गांधी ने टीम का गर्मजोशी से स्वागत किया। इस दौरान अभियान में शामिल सभी को सम्मानित किया गया।
अभियान एक, संदेश दिए अनेक
ऑल-वूमेन गंगा रिवर राफ्टिंग अभियान बीएसएफ की 20 बहादुर महिला सीमा प्रहरियों द्वारा महिला सशक्तिकरण, स्वच्छ गंगा, महिला स्वास्थ्य और साहसिक खेल में महिलाओं की भागीदारी को प्रोत्साहन के संदेश के साथ 2,500 किलोमीटर की यात्रा के दौरान आने वाले सभी शहरों व गांवो में जागरूकता कार्यक्रम किए व जागरूकता रैलियां निकालीं। हजारों स्कूली छात्रों, स्थानीय लोगों व महिलाओं ने इन कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। इन जागरूकता कार्यक्रमों में नदी संरक्षण और सामाजिक सशक्तिकरण के मिशन को बढ़ावा देना और नदी के किनारों, घाटों और आस-पास के इलाकों की सफाई पर समुदायों का ध्यान भी आकर्षित किया गया।
बेटियां समुद्र की गहराइयां और नीले गनन को नाप सकती हैंः प्रिया मीणा
इस टीम को लीड कर रहीं उप निरीक्षक प्रिया मीणा ने बताया कि यह बहुत ही अद्भुत, रोमांचक और चुनौतियों से भरा था। कहती हैं गंगा मां के बीच राफ्टिंग करना बहुत आसान नहीं है। यह पहली बार हमने किया। किसी को इसके बारे में बहुत जानकारी नहीं थी। गंगा का ठंडा पानी, कई जगह बिल्कुल पानी न होने से काफी दिक्कत आई। गंगा में कहीं रेत के टीले हैं तो दलदल है। साथ में गंगा के जलीय जीव मगरमच्छ जैसी चुनौतियां हमेशा रहीं। लेकिन जो मौका हमको बीएसएफ ने दिया। यह साबित करता है कि बेटियों पर भरोसा करके देखिए, बेटियां समुंद्र की गहराइयां और नीले गगन को नाप सकती हैं।