चीन के साथ चल रहे तनाव के बीच भारत और ऑस्ट्रेलिया की नौसेनाओं ने बुधवार को हिंद महासागर में संयुक्त अभ्यास शुरू किया। इस दौरान दोनों देशों के नौ सेनाओं ने अपनी ताकत दिखाई। इस दो दिनी अभ्यास के दौरान दोनों नौसेनाओं ने जटिल नौसैनिक कौशल, विमान विरोधी ड्रिल और हेलिकॉप्टर अभियानों का जलवा देखने को मिलेगा। जून से अब तक यह भारतीय नौसेना की चौथी अहम सैन्य ड्रिल है। इससे पहले अमेरिका, जापान और रूस के साथ ठीक ऐसा ही नौसैनिक अभ्यास पूरा किया जा चुका है।
अपने द्विपक्षीय संबंधों को जून में समग्र सामरिक साझेदारी के जरिए मजबूत करने वाले भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच इसके बाद यह पहला बड़ा सैन्य अभ्यास है। जून में दोनों देशों ने लॉजिस्टिक सपोर्ट के लिए एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों का पारस्परिक इस्तेमाल करने की ऐतिहासिक संधि पर हस्ताक्षर किए थे। भारत इससे पहले अमेरिका, फ्रांस, सिंगापुर और जापान के साथ भी ऐसा समझौता कर चुका है।
यह नौसैनिक अभ्यास सीमा पर भारत और चीन के बीच चल रहे तनाव और हिंद महासागर क्षेत्र में चीनी नौसेना की बढ़ती गतिविधियों के बीच आयोजित हो रहा है। भारतीय नौसेना का आंगन कहे जाने वाले हिंद महासागर को भारतीय सामरिक हितों के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है।
नौसेना प्रवक्ता ने कहा, इस अभ्यास का मकसद पारस्परिकता को बढ़ाना, आपसी समझ को विकसित करना और एक-दूसरे की बेहतर बातों को सीखना है। उन्होंने कहा, इस अभ्यास के दौरान एडवांस सतह व वायु विरोधी अभियान शामिल रहेंगे। साथ में नौसैनिक रणनीति, नाविक एक्सरसाइज और क्रास डेक फ्लाइंग ऑपरेशंस शामिल होंगे।
प्रवक्ता के मुताबिक, ऑस्ट्रेलियाई नौसेना अपने एयर वारफेयर डेस्ट्रायर एचएमएएस होबार्ट को लीड शिप के तौर पर अभियान में साथ लाई है। इनके साथ भारत ने अपने स्टील्थ फ्रिगेट आईएनएस सहयाद्रि और मिसाइल कॉर्वेट आईएनएस कार्मुक को मैदान में उतारा है।