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IONS Chairmanship: भारत ने संभाली इंडियन ओशन नेवल सिंपोजियम की कमान, 30 से अधिक देशों के बीच बढ़ेगा आपसी सहयोग

Fri, 20 Feb 2026 02:21 PM IST
अमन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, विशाखापत्तनम

सार

भारत ने इंडियन ओशन नेवल सिंपोजियम (आईओएनएस) की अध्यक्षता संभाल ली है। इसका एलान वाइस एडमिरल तरुण सोबती ने 9वें कॉन्क्लेव में किया। भारत अब समुद्री सुरक्षा और शांति के लिए नेतृत्व करेगा। इस मंच में 25 देश शामिल हैं जो समुद्री चुनौतियों, पाइरेसी और आपदाओं से निपटने के लिए मिलकर काम करते हैं।
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भारतीय नौसेना - फोटो : ANI
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विस्तार
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नौसेना के डिप्टी चीफ वाइस एडमिरल तरुण सोबती ने शुक्रवार को एक बहुत ही महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने बताया भारत ने यहां हो रहे 9वें कॉन्क्लेव ऑफ चीफ्स के दौरान इंडियन ओशन नेवल सिंपोजियम (आईओएनएस) की अध्यक्षता संभाल ली है।
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वाइस एडमिरल सोबती ने कहा कि भारत इस मंच का नेतृत्व संभालते ही एक बड़ी जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार है। भारत का मुख्य उद्देश्य समुद्री इलाकों में शांति, स्थिरता और सुरक्षा पक्की करना है। उन्होंने बताया कि आज के समय में समुद्री चुनौतियां सभी देशों के लिए लगभग एक जैसी हैं। इन चुनौतियों का सामना करने के लिए हिंद महासागर क्षेत्र की नौसेनाओं के बीच आपसी तालमेल, बेहतर संचार और मिलजुलकर काम करने की जरूरत है।

क्या है आईओएनएस 
इंडियन ओशन नेवल सिंपोजियम एक स्वैच्छिक पहल है। इसका मकसद हिंद महासागर के तटीय देशों की नौसेनाओं के बीच सहयोग बढ़ाना है। यह मंच समुद्री मुद्दों पर चर्चा करने के लिए एक खुला माहौल देता है। इसमें नौसेना के पेशेवर आपस में जानकारी साझा करते हैं ताकि समस्याओं की समझ विकसित हो और मिलकर हल निकाले जा सकें।
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कितने हैं सदस्य देश?
आईओएनएस में अभी 25 सदस्य देशों की नौसेनाएं और नौ ऑब्जर्वर देश शामिल हैं। यह भरोसा और पारदर्शिता बढ़ाने वाले एक मजबूत ढांचे को बढ़ावा देता है। इसकी अध्यक्षता हर दो साल में सदस्य देशों के बीच बदलती रहती है। आईओएनएस मुख्य रूप से तीन समूहों के जरिए काम करता है। इसमे 
मानवीय सहायता और आपदा राहत, समुद्री सुरक्षा और जानकारी साझा करना और आपसी तालमेल शामिल है।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और पाइरेसी पर चिंता
इस मौके पर रॉयल नीदरलैंड्स नेवी के डिप्टी कमांडर रॉब डी विट ने भारत को इस आयोजन के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि हिंद महासागर का क्षेत्र डच और यूरोपीय अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम है। उन्होंने जोर दिया कि आईओएनएस जैसे मंच सुरक्षा और स्थिरता के लिए बहुत जरूरी हैं।
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समुद्री लुटेरों (पाइरेसी) का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि 'हॉर्न ऑफ अफ्रीका' के पास घटनाओं में कमी आई है, लेकिन कुछ नए इलाकों में खतरा अब भी बना हुआ है। उन्होंने कहा कि नौसेनाओं के बीच ऑपरेशनल अनुभव साझा करने से पाइरेसी के खिलाफ लड़ाई मजबूत होगी और इससे लंबे समय तक आर्थिक खुशहाली बनी रहेगी।

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