वैश्विक युद्ध और अस्थिरता के बीच भारत और अरब लीग देशों ने कूटनीति व शांति को प्राथमिकता दी है। नई दिल्ली में हुई बैठक में दोनों पक्षों ने 1967 की सीमाओं पर आधारित संप्रभु फलस्तीन राज्य, गाजा में युद्धविराम और समुद्री सुरक्षा का समर्थन करते हुए भारत-अरब संबंधों को नई दिशा देने का संकेत दिया।
वैश्विक तनाव और दुनिया के कई देशों के बीच चल रहे युद्ध की स्थिति के बीच भारत और अरब लीग देशों ने कूटनीति और शांति का साझा रास्ता चुना है। शनिवार को भारत और अरब लीग के देशों आपसी रिश्तों को और मजबूत करने की दिशा में एक साझा और व्यापक सोच पेश की। दोनों पक्षों ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संबंध संयुक्त राष्ट्र के चार्टर के अनुसार होने चाहिए और दुनिया में शांति व सुरक्षा बनाए रखना सभी की साझा जिम्मेदारी है।
नई दिल्ली में हुई भारत-अरब विदेश मंत्रियों की बैठक में आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता, संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सम्मान और मध्य पूर्व में स्थायी शांति पर जोर दिया गया। बैठक में फलस्तीन को संप्रभु राज्य का समर्थन, गाजा में युद्धविराम और समुद्री सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर साझा सहमति बनी, जिससे भारत-अरब रिश्तों को नई दिशा मिलती दिख रही है।
आतंकवाद के मुद्दे पर दोनों पक्षों की एकजुटता
बता दें कि यह बातचीत दूसरी भारत-अरब विदेश मंत्रियों की बैठक में हुई, जिसकी मेजबानी भारत ने की। इस बैठक में अरब लीग के 19 सदस्य देशों ने हिस्सा लिया, जो इस संगठन की अहमियत को दिखाता है। बैठक के अंत में जारी घोषणा में कहा गया कि भारत और अरब लीग ने सीमा पार आतंकवाद की कड़ी निंदा की है और सभी देशों से मिलकर आतंकवाद से लड़ने, आतंकी ढांचे को खत्म करने और आतंक की फंडिंग रोकने की अपील की है। साथ ही, आतंकवादी हमलों के दोषियों को बिना देरी के सजा दिलाने की बात कही गई।
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पहलगाम आतंकी हमले की निंदा
इसके साथ ही घोषणा में पहलगाम में हुए आतंकी हमले का खास तौर पर जिक्र करते हुए कहा गया कि अरब लीग के देशों ने इस हमले की निंदा की है और आतंकवाद के खिलाफ भारत को पूरा समर्थन देने का भरोसा दिया है। बैठक में लाल सागर और बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य में समुद्री जहाजों पर हूती मिलिशिया के हमलों की निंदा की गई। इसके अलावा दोनों पक्षों ने कहा कि इन समुद्री रास्तों की सुरक्षा सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की जिम्मेदारी है। उन्होंने अदन की खाड़ी, अरब सागर और हिंद महासागर में स्थिरता को नुकसान पहुंचाने वाली किसी भी कोशिश के खिलाफ चेतावनी दी।
इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति