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India-Nepal: भारत और नेपाल ने कानूनी सहायता समझौते पर किया हस्ताक्षर, आपराधिक मामलों की जांच में मिलेगी मदद

Wed, 18 Feb 2026 12:38 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला

सार

भारत और नेपाल ने  हाल ही में एक समझौते पर हस्ताक्षर किए है। यह समझौता आपराधिक मामलों में  कानूनी सहायता कर लिए है। इस में दोनों देशों के अधिकारियों को आपराधिक जांच और कानूनी कार्यवाही में सहयोग करने में मदद मिलेगी। 

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भारत-नेपाल ने कानूनी सहायता समझौते पर किए हस्ताक्षर - फोटो : आईएएनएस
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विस्तार
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भारत और नेपाल ने आपराधिक मामलों में पारस्परिक कानूनी सहायता पर एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस में दोनों देशों के सक्षम अधिकारियों को आपराधिक जांच और कानूनी कार्यवाही में सहयोग करने में मदद मिलेगी। यह समझौता कई वर्षों की बातचीत के बाद हुआ है। पिछले साल जुलाई में नई दिल्ली में गृह सचिव स्तर की बैठक में सहमति बनी थी। हालांकि इसपर मंगलवार को काठमांडू में हस्ताक्षर किए गए। इससे वित्तीय और गैर-वित्तीय अपराधों के साथ-साथ आतंकवाद से निपटने के लिए सहयोग को औपचारिक रूप दिया गया।

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समझौते से कानून के शासन को मजबूती मिलेगी

कानून मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि नेपाल के विधि, न्याय और संसदीय कार्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव बिनोद कुमार भट्टराई और नेपाल में भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने विधि मंत्री अनिल कुमार सिन्हा और कई मंत्रालयों के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में अपनी-अपनी सरकारों की ओर से दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए। मंत्रालय ने कहा, "इससे आपराधिक मामलों की जांच, अभियोजन और न्यायिक कार्यवाही के दौरान साक्ष्य एकत्र करने और आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के सक्षम अधिकारियों के बीच सहयोग के लिए एक औपचारिक कानूनी ढांचा उपलब्ध होगा।" मंत्रालय ने आगे कहा कि इस समझौते से कानून के शासन को मजबूत करने और न्याय प्रशासन में संस्थागत समन्वय को बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान मिलने की उम्मीद है।

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नेपाल में वित्तीय अपराधों को कम करने में मदद करेंगी

नेपाल में वित्तीय अपराधों को कम करने इसमें कहा गया है, "इस समझौते के लागू होने से दोनों देशों के केंद्रीय अधिकारियों के बीच सहयोग और अधिक मजबूत होने की उम्मीद है।" यह नेपाल में वित्तीय अपराधों को कम करने और जांच, अभियोजन और न्यायनिर्णय को अधिक प्रभावी बनाने में एक मील का पत्थर साबित होगा।" मंत्रालय ने आगे कहा कि यह समझौता मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवादी गतिविधियों के वित्तपोषण की रोकथाम से संबंधित पारस्परिक मूल्यांकन में भी सहायता करेगा। काठमांडू के अधिकारियों को उम्मीद है कि भारत के साथ हस्ताक्षरित समझौता नेपाल को वैश्विक मनी लॉन्ड्रिंग विरोधी संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की ग्रे लिस्ट से बाहर निकलने में मदद करेगा।

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चीन ने भी नेपाल से किया है यह समझौता

नेपाल को पिछले साल फरवरी में एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में फिर से शामिल कर लिया गया था, जबकि 2014 में इसे इस सूची से हटा दिया गया था। हाल ही में, नेपाल ने आतंकवादियों को वित्तीय संसाधनों तक पहुंचने से रोकने के लिए कई नियम भी लागू किए हैं। इससे पहले 2019 में राष्ट्रपति शी जिनपिंग की हिमालयी देश की यात्रा के दौरान नेपाल ने चीन के साथ पारस्परिक कानूनी सहायता समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। दोनों पक्षों द्वारा राजनयिक चैनलों के माध्यम से एक-दूसरे को सूचित करने के बाद यह समझौता प्रभावी होगा। नेपाली अधिकारियों के अनुसार दोनों पक्ष आपराधिक जांच अभियोजन और न्यायिक कार्यवाही में सहयोग को सुगम बनाने के लिए एक औपचारिक तंत्र स्थापित करेंगे। हालांकि, दोनों देशों के बीच प्रत्यर्पण संधि पर हस्ताक्षर होने बाकी है। विवाद का मुख्य मुद्दा यह है कि क्या तीसरे देशों के नागरिकों का प्रत्यर्पण किया जाए या नहीं।

 

 

 

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