भारत और जापान के बीच सैन्य रसद से जुड़ा एक अहम समझौता हो सकता है। इस समझौते के तहत दोनों देशों को एक दूसरे के नौसेना अड्डों से कई सुविधाएं मिल सकेंगी। हिंद महासागर और दक्षिण चीन सागर में चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने में यह समझौता बेहद अहम साबित हो सकता है। इस सप्ताह के अंत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जापान दौरे पर होंगे। इस दौरान जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे के साथ क्रॉस सर्विसिंग एग्रीमेंट उनका बड़ा एजेंडा होगा।
भारत में जापान के राजदूत केंजी हिरामात्सू ने कहा कि दोनों देशों में सैन्य रसद को लेकर यह समझौता हो सकता है। उम्मीद है कि समझौते पर औपचारिक बातचीत की शुरुआत होगी। यह अच्छा समय है जब हम रसद के मामले में एक दूसरे की मदद कर सकते हैं।
इस समझौते के तहत जापान के जहाजों को भारत के नौसेना अड्डों से कई सुविधाएं मिल पाएंगी। वे अंडमान और नीकोबार जैसे द्वीपों से भी ईंधन और अन्य सामग्री ले सकेंगे। अंडमान और नीकोबार मलक्का स्ट्रेट के बेहद पास है, जहां से जापान ही नहीं चीन के भी व्यापारिक जहाज गुजरते हैं। ठीक इसी तरह भारत भी जापान के नौसेना अड्डों से सुविधाएं ले सकेगा।