इस्रायल और भारत कोविड-19 की जांच के लिए चार अलग-अलग तरह की तकनीकों के लिए परीक्षण कर रहे हैं। इसमें लगभग 30 सेकेंड में कोविड-19 का पता लगाने की क्षमता है। इसमें श्वास विश्लेषक (ऐसी तकनीक जो किसी की आवाज सुनकर बता सकती है कि वह कोरोना संक्रमित है या नहीं) और आवाज परीक्षण, जो सांस के नमूने पर रेडियो तरंगों का उपयोग करता है, शामिल हैं। एक इस्रायली बयान में यह जानकारी दी गई है।
इस्रायली विज्ञप्ति के अनुसार, भारत में इस्रायली राजदूत रोन माल्का ने शुक्रवार को डॉ. राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल में बनाए गए विशेष परीक्षण स्थल का दौरा किया। यहां उन्होंने पिछले तीन दिन से तीव्र कोविड-19 जांच के लिए किए जा रहे परीक्षणों को देखा। माल्का के साथ प्रो. के विजयराघवन भी थे, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार हैं।
इस्रायल के रक्षा मंत्रालय के रक्षा अनुसंधान और विकास निदेशालय, भारत के रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन, वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद और प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार, भारत के सहयोग और इस्रायल व भारत के विदेश मंत्रालयों के समन्वय से संयुक्त रूप से तीव्र जांच विकसित की जा रही है।
बयान में कहा गया है, ‘आरएमएल अस्पताल परीक्षण स्थलों में से एक है, जिसने चार अलग-अलग प्रकार की तकनीकों का परीक्षण शुरू किया है, जिसमें कोरोना वायरस का पता लगाने की क्षमता 30 सेकंड से कम है।’ बयान में प्रो विजयराघवन के हवाले से कहा गया है, ‘मुझे यकीन है कि इनमें से कुछ प्रयास जरूर सफल होंगे और हमारे देशों और मानवता के लिए बहुत महत्वपूर्ण रहेंगे।’