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Afghanistan Issue: भारत समेत पांच मध्य एशियाई देशों ने किया मंथन, कहा- आतंक के लिए न हो अफगान जमीन का इस्तेमाल

Tue, 07 Mar 2023 09:49 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

राजधानी दिल्ली में अफगानिस्तान पर भारत-मध्य एशिया संयुक्त कार्यकारी समूह की पहली बैठक में देश के हालात पर गहन चर्चा हुई। साथ ही, इस बैठक में भारत ने अफगानिस्तान को 20,000 मीट्रिक टन गेहूं की सहायता की एक नई किश्त की भी घोषणा की।
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अफगानिस्तान में तालिबान - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल किसी भी आतंकवादी गतिविधि के लिए नहीं होना चाहिए। भारत और पांच मध्य एशियाई देशों ने मंगलवार को इसकी वकालत की है। साथ ही इन देशों ने यह भी कहा है कि अफगानिस्तान में सही मायने में समावेशी राजनीतिक ढांचे का गठन और विस्तार किया जाना चाहिए, जिसमें महिलाओं सहित सभी अफगानी नागरिकों के अधिकारों और उनके हितों का सम्मान किया जाए। दरअसल, राजधानी दिल्ली में अफगानिस्तान पर भारत-मध्य एशिया संयुक्त कार्यकारी समूह की पहली बैठक में देश के हालात पर गहन चर्चा हुई। साथ ही, इस बैठक में भारत ने अफगानिस्तान को 20,000 मीट्रिक टन गेहूं की सहायता की एक नई किश्त की भी घोषणा की। भारत ने कहा कि इस गेहूं की खेप ईरान में चाबहार बंदरगाह के माध्यम से भेजी जाएगी।

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इन मुद्दों पर हुई चर्चा
इस समूह ने बैठक के बाद एक संयुक्त बयान भी जारी किया। जिसमें कहा गया है कि बैठक में 'सही मायने में समावेशी और प्रतिनिधिक राजनीतिक ढांचे’ के गठन के महत्व पर जोर दिया गया, जो सभी अफगानियों के अधिकारों का सम्मान करे और शिक्षा तक पहुंच सहित महिलाओं, लड़कियों और अल्पसंख्यक समूहों के सदस्यों के समान अधिकार को सुनिश्चित करे। 

बयान में आगे यह भी कहा गया है कि विचार-विमर्श के दौरान अधिकारियों ने आतंकवाद, उग्रवाद, कट्टरता और मादक पदार्थों की तस्करी के क्षेत्रीय खतरों पर चर्चा की और इन खतरों का मुकाबला करने के लिए समन्वित प्रयास की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया।
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आतंकी गतिविधियों के नहीं हो अफगान की धरती का इस्तेमाल
बैठक के दौरान अन्य मुद्दों के साथ ही इस बात पर भी जोर दिया गया कि अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल किसी भी आतंकवादी गतिविधि के लिए जिसमें आश्रय देने, प्रशिक्षण देने, योजना बनाने या वित्तपोषण करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। साथ ही इस बात की फिर से पुष्टि की गई कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) प्रस्ताव 1267 द्वारा नामित आतंकवादी संगठनों सहित किसी भी आतंकवादी संगठन को अफगानिस्तान द्वारा शरण नहीं दी जानी चाहिए । 

इन देशों के प्रतिनिधि हुए शामिल
गौरतलब है कि बीते साल दिसंबर में अफगानिस्तान में महिलाओं के लिए विश्वविद्यालयी शिक्षा पर प्रतिबंध लगाने के तालिबान के फैसले की जमकर आलोचना हुई थी। ऐसा करने वाले कई प्रमुख देशों में भारत भी शामिल था। मंगलवार को हुई बैठक में मेजबान भारत के अलावा बैठक में कजाकिस्तान, किर्गिज गणराज्य, तजाकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उज्बेकिस्तान के विशेष राजनयिकों और वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। संयुक्त राष्ट्र मादक पदार्थ और अपराध कार्यालय (यूएनओडीसी) और संयुक्त रार्ष्ट विश्व खाद्यान्न कार्यक्रम (यूएनडब्ल्यूएफपी) के सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने भी बैठक में हिस्सा लिया।

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