भारत और चीन के वरिष्ठ सैन्य कमांडरों ने पूर्वी लद्दाख में तनाव कम करने और सैनिकों की वापसी पर दोनों देशों के बीच बनी पांच सूत्रीय सहमति को लागू करने के लिए सोमवार को वार्ता की। सरकारी सूत्रों ने बताया कि छठे दौर की कॉर्प्स कमांडर स्तर की वार्ता पूर्वी लद्दाख में भारत के चुशूल सेक्टर के पार वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन की तरफ स्थित मोल्डो में सुबह करीब नौ बजे शुरू हुई।
दरअसल, बीते कुछ हफ्तों से चीन के हिस्से में आने वाला मोल्डो गैरिसन में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) की गतिविधियां काफी बढ़ गई हैं। जब से सीमा पर चीन का आक्रोश बढ़ा है, तब से राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) बिपिन रावत और सेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवणे हालात पर नजर रखे हुए हैं।
शनिवार को भारतीय सेना की एक उच्च स्तरीय बैठक हुई थी। इस बैठक में एनएसए अजीत डोभाल और सीडीएस जनरल बिपिन रावत समेत आला अधिकारी शामिल हुए थे। इस बैठक में ये तय किया गया था कि भारत की तरफ से चीन के सामने कौन-कौन से मुद्दे उठाए जाएंगे।
वहीं, सीमा पर जारी तनाव के बीच गुरुवार को सेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवणे श्रीनगर और जम्मू कश्मीर के दौरे पर पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने राज्य की सुरक्षा स्थिति और सुरक्षा बलों के ऑपरेशनल तैयारियों का जायजा लिया।
इस दौरान उन्होंने कहा था कि एलएसी पर तनातनी और युद्ध की आशंका के मद्देनजर भारतीय सेना के हौसले पूरी तरह से बुलंद है। दुश्मन के किसी भी दुस्साहस का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए भारतीय सेना जम्मू-कश्मीर से लेकर लद्दाख तक पूरी तरह तैयार है।