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बॉर्डर पर आमने-सामने हैं भारत और चीन! जानिए किसमें कितना है दम!

Thu, 25 Jun 2020 06:25 PM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

रक्षा का एक बड़ा हिस्सा अमेरिका, रूस, इस्राइल और यूरोपीय देशों से आयात पर निर्भर है। लेकिन सैन्य और युद्धक रणनीतिक कुशलता, सैनिकों के रूप में जुझारू आपरेशनल, प्रमाणित सेना के मामले भारत की स्थिति बहुत बेहतर है...
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भारत चीन सैन्य संसाधन - फोटो : Amar Ujala (File)
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विस्तार
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भारत और चीन दुनिया की दो उभरती आर्थिक, राजनीतिक, सामरिक ताकतें हैं। चीन के एशिया में वर्चस्व के आगे भारत खड़ा है, तो दुनिया की बढ़ती तेज अर्थव्यवस्थाओं में से एक भारत की राह में चीन सीधे या परोक्ष रूप से कांटा बिछाता रहता है।

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ताजा घटनाक्रम में चीन की सेना ने पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में कई जगहों पर घुसपैठ दोहराई है। इससे पहले दोनों देशों के सैन्य बलों के बीच में पूर्वी लद्दाख में 5 मई, नाकुलॉ में 9 मई और 15 जून को गलवां नदी घाटी में हिंसक झड़प हो चुकी है।

घुसपैठ के लिहाज से देखें तो चीन 2013 में डेपसांग में 2014 में चुमार में, 2017 में डोकलाम में अहिंसक घुसपैठ की। लेकिन दबाव पड़ने पर पीछे हट गया। इस बार भारी भरकम सैन्य संसाधन के साथ आक्रामक घुसपैठ, कब्जा और एलएसी की स्थिति बदलने के इरादे से आया है।

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चीन की सैन्य ताकत

भारत के मुकाबले चीन की वायुसेना, नौसेना, पैदल सेना तीनों के पास हथियार, मशीनी तकनीक संसाधन, निगरानी के उपकरण काफी अधिक हैं। सामरिक विशेषज्ञों की मानें तो कुछ मामले में दो-तीन गुणा तक अधिक हैं।

कुछ मामलों में चीन के पास वह हथियार और संसाधन हो सकते हैं या हैं जो भारत के पास नहीं हैं। चीन ने दुनिया के तमाम देशों से युद्धक विमान, फ्रिगेट, विध्वंसक, बमवर्षक, रॉकेट लॉन्चर, हेलीकॉप्टर आदि मंगाए, उनकी कॉपी की और कॉपीराइट का उल्लंघन करते हुए नए हथियार विकसित कर लिए।

इसलिए यह साफ तौर पर नहीं कहा जा सकता कि चीन के पास किस स्तर के कितने हथियार, साजो-सामान, संसाधन हैं। हां, दुनिया में रक्षा क्षेत्र पर वह अमेरिका के बाद सबसे ज्यादा, भारत के रक्षा बजट का काफी समय से करीब चार खर्च करने वाला देश जरूर है।

ग्लोबल फायर पॉवर इंडेक्स चीन को दुनिया में अमेरिका और रूस के बाद तीसरा स्थान देता है। कई मामलों में वह फायर पावर के मामले में रूस के बराबर या उससे खुद को आगे समझता है और अपना मुकाबला सीधे अमेरिका से करता है। चीन के इस मुकाबले में भारत पीछे है।

फायर पावर

ग्लोबल फायर पावर इंडेक्स में चीन को 0.0691 की रैंकिंग हासिल है। रूस का इंडेक्स 0.0639 और अमेरिका का 0.0615 है। 0.000 की रेटिंग का इंडेक्स परफेक्ट होना है। यह रेटिंग रक्षा क्षेत्र में क्षमताओं के 50 मानकों के आधार पर है।

इस तरह से माना जाता है कि हवाई युद्ध में अमेरिका नंबर वन, जमीनी युद्ध में रूस नंबर वन, दोनों के संतुलित फायर पावर के हिसाब से चीन नंबर तीन पर है।

चीन के पास तरह-तरह की मिसाइलों, परमाणु आयुधों को ले जाने वाले हथियारों की श्रृंखला, मिसाइल हमलों से बचाने की प्रतिरक्षी प्रणाली, फाइटिंग कैपेबिलिटी वाले ड्रोन, फैंटो और नैनो सेटलाइट जैसी टेक्नोलॉजी, साइबर वारफेयर में हैकिंग से हमले तक में सक्षम तैयारी है।

चीन के सैन्यबल के पास करीब 3210 एयरक्राफ्ट हैं। पैरा और एक्टिव मिलाकर 38 लाख का मानव सैन्य बल है। इनमें से 1,232 विभिन्न श्रेणी के फाइटर जेट, 371 केवल आक्रमण के लिए लड़ाकू विमान का बेड़ा, 224 परिवहन, 314 प्रशिक्षण के विमान हैं।

111 फाइटर विशेष अभियान के लिए और कुल 911 हेलीकॉप्टर (281 आक्रमण करने में सक्षम) हैं। विभिन्न श्रेणी के 30500 टैंक, 33000 सैन्य वाहन, 38 सेल्फ प्रोपेल्ड गन, 3600 टोड गन, 2,650 राकेट प्रोजेक्टर हैं।

इस लिहाज से चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) खुद को दुनिया की दूसरी सैन्य ताकत बताती है। पीएलए के युद्धाभ्यास रिपोर्ट में भी वह खुद को अमेरिकी क्षमता के करीब ही बताती है।

दो एयरक्राफ्ट कैरियर के साथ चीन की नौसेना के पास 777 एसेट्स हैं। 36 विध्वंसक, 52 फ्रिगेट, 50 कार्वेट्स, 74 पनडुब्बी और 220 पेट्रोल वेसेल्स का बेड़ा है। माइन वॉरफेयर में सक्षम 29 संसाधन हैं।

भारत की सैन्य ताकत

भारत चीन की तुलना में पिछले कई सालों से रक्षा क्षेत्र पर कई गुणा कम खर्च करता है। ग्लोबल फायर पावर इंडेक्स में भारत की रेटिंग 0.0953 है। तकनीक, मशीन और मशीनी संसाधन के लिहाज से भारत, चीन से पीछे हैं। रक्षा क्षेत्र के हथियारों के निर्माण में भारत की रफ्तार चीन की तुलना में बहुत सुस्त है।

रक्षा का एक बड़ा हिस्सा अमेरिका, रूस, इस्राइल और यूरोपीय देशों से आयात पर निर्भर है। लेकिन सैन्य और युद्धक रणनीतिक कुशलता, सैनिकों के रूप में जुझारू आपरेशनल, प्रमाणित सेना के मामले भारत की स्थिति बहुत बेहतर है। कम संसाधन के बावजूद भारत के सैनिक, सैन्य बलों के विशेष कमांडो, फाइटर पालयट, सबमैरीन वारफेयर के नेवल ऑफिसर दुनिया में शानदार स्थान रखते हैं।

युद्धाभ्यास के दौरान इसका मुकाबला केवल रूस या इस्राइल के कमांडो ही करने की स्थिति में होते हैं। युद्धाभ्यास के दौरान चाहे अमेरिका हो या रूस भारत के सैन्य बल कम, सीमित संसाधनों के बावजूद वारगेम में अकसर धूल चटाते मिल जाते हैं।

भारतीय सेना के पास पाकिस्तान से तीन युद्ध, एक संघर्ष, चीन से एक युद्ध लड़ने का अनुभव है। पिछले तीन दशक से भारतीय सेना आतंकवाद विरोधी अभियान के अनुभव के साथ साथ हर मौसम, हर क्षेत्र और हर तापमान में युद्ध लडऩे की क्षमता रखती है। इतनी विविधता विश्व की कम सेनाओं के पास है।

फायर पावर

भारतीय बलों के तीनों सेनाओं में सैनिकों की संख्या 14 लाख 44 हजार के करीब है। इनमें से 12.37 लाख सेना, 67, 228 नौसेना, 1.39 लाख के करीब वायुसैनिक हैं। इसमें रिजर्व बलों आदि को जोड़ लें तो यह संख्या 35 लाख के करीब है।

भारतीय सैन्य अधिकारी, विशेष अभियान के दस्ते, युद्ध की रणनीति और हौसला दुनिया में सबसे प्रमुख स्थान रखता है। मानवीय युद्धक कुशलता, दक्षता दुनिया में सामरिक शक्ति के लिहाज से भारत को चौथे पायदान पर लाकर खड़ा कर सकती है।

भारत के पास कुल 2123 विमान हैं। इनमें 538 फाइटरजेट (सुखोई, जगुआर, मिराज, मिग, एलसीए), 172 विशेष आक्रमण में सक्षम, 250 लॉजिस्टिक सपोर्ट के विमान, 359 प्रशिक्षण के लिए तथा 77 विशेष अभियानों के लिए हैं।

करीब 722 हेलीकॉप्टर्स का बेड़ा है, इसमें आक्रमण जैसे सैन्य अभियान के लिए सक्षम हेलीकॉप्टर दो से ढाई दर्जन हैं। 8686 सैन्य वाहन, 4292 टैंक, 235 सेल्फ प्रोपेल्ड, 4060 टोड गन, 266 रॉकेट प्रोजेक्टर हैं।

नौसेना के 285 एसेट्स में से एक एयरक्राफ्ट कैरियर, 10 विध्वंसक, 13 फ्रिगेट, 19 कार्वेट्स, 16 पनडुब्बियों का बेड़ा, तीन माइन वारफेयर में सक्षम और 139 पेट्रोल वेसेल्स हैं।

क्या है बड़ा अंतर

युद्ध के पैमाने बदले हैं। हवाई कवर से जमीन पर उतरने की रणनीति ने युद्ध की डिजाइन को नया रूप दिया है। इसमें साइबर अटैक, जैविक, रासायनिक, हवाई हमले, निगरानी, रिअल टाइम इंटेलिजेंस की क्षमता और वित्तीय, खाद्यान्न तथा उर्जा के संसाधन जैसे पहलू क्षमता पर बड़ा असर डालते हैं।

इस तुलना में चीन भारत से कहीं पीछे नहीं है। चीन के पास मिसाइल, लड़ाकू विमानों, हेलीकॉप्टर के हमलों से बचने के लिए मजबूत प्रतिरक्षी प्रणाली है। इस बारे में अभी भारत का हाथ तंग है। भारत के पास 100 किमी से लेकर 6-7 हजार किमी दूर तक परमाणु हथियारों के साथ मार करने वाली विभिन्न मिसाइलें हैं।

इस्राइल की बराक लंबी दूरी की मारक मिसाइल है। यहां तक कि चीन को कई बार खत्म कर देने वाले परमाणु हथियार भी हैं, लेकिन परमाणु हथियारों की संधि से बंधे हैं। इस क्षमता में चीन भी भारत से पीछे नहीं है।

दोनों देशों के सैनिकों, सैन्य अधिकारियों में बड़ा फर्क

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सैन्य डेवलपमेंट पर नजर रखने वाले पूर्व सैन्य अधिकारियों का कहना है कि युद्ध केवल हथियार से नहीं लड़े जाते। स्वर्ण सिंह भी यही कहते हैं। युद्ध में मैन बिहाइंड द मशीन (मशीन के पीछे का सैनिक), उसका हौसला, कुशलता, कुशाग्रता, रणनीति सबसे अहम भूमिका निभाती है।

टारगेट चुनने का कौशल और क्षमता सारा नतीजा बदल देती है। मेजर जनरल (पूर्व) लखविंदर सिंह का कहना है कि भारत की यह क्षमता दुनिया के देशों ने कई बार देखी। हमनें जिस तरह से करगिल की चोटियों पर कब्जा किया, वह आपने आप में बड़ा मानक है, लेकिन अभी चीन का यह कौशल नहीं दिखा है।
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1962 का भारत नहीं है

पूर्व वायुसेनाध्यक्ष एयरचीफ मार्शल चुनौती भरे लहजे में कहते हैं कि अब 1962 का भारत नहीं है। चीन को इसे समझ लेना चाहिए। पूर्व रक्षा मंत्री एके एंटनी भी कहते हैं कि पिछले दो दशक से सैन्य आधुनिकीकरण के बाद वर्तमान भारत 1962 का नहीं है। इसी सैन्य ताकत, कुशलता, दक्षता के बलबूते रक्षा मंत्री और सीडीएस जनरल रावत कहते हैं कि भारतीय सैन्य बल हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सैन्य बलों की इस ताकत के बल पर देश के हितों की सुरक्षा, सीमाओं की रक्षा, एक इंच भी जमीन न छोड़ने का विश्वास और संप्रभुता की रक्षा का भरोसा जताते हैं। विदेश, रक्षा मामलों के संवाददाता रंजीत कुमार कहते हैं कि इसमें कौन सा शक है। भारत अब एक आर्थिक, राजनीतिक, सामरिक ताकत है। इसे झुठलाया नहीं जा सकता।

इसे भारत ही नहीं चीन भी समझता है। चीन को भी पता है कि वह भले भारत के दस ठिकाने पर आक्रमण कर देगा, लेकिन भारत उसके तीन-चार ठिकाने ध्वस्त करके उसके वर्चस्व की हवा निकाल देगा।
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