प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 16वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए रूस पहुंच गए हैं। प्रधानमंत्री मोदी 22 से 23 अक्तूबर तक रूस के कजान में रहेंगे। कजान पहुंचने पर पीएम मोदी का जबरदस्त स्वागत हुआ। पीएम मोदी यहां ब्रिक्स देश के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। इसके अलावा वे कई अन्य कार्यक्रमों में भी शामिल होंगे। रूस के कजान में यह शिखर सम्मेलन उस वक्त हो रहा है जब दुनिया में कई मोर्चों पर युद्ध चल रहा है। जहां रूस-यूक्रेन बीते ढाई साल से जंग में उलझे हुए हैं तो वहीं दूसरी ओर पश्चिम एशिया में इस्राइल और हमास के बीच शुरू हुए युद्ध के बाद कई मोर्चों पर संघर्ष जारी है। पीएम मोदी ने रूस पहुंचकर एक बार फिर दोहराया कि हर समस्या का हल शांति से ही संभव है।
ब्रिक्स है क्या? 16वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का कार्यक्रम क्या है? सम्मेलन का हिस्सा कौन-कौन है? सम्मेलन का एजेंडा क्या है? पीएम मोदी के रूस दौरे का कार्यक्रम क्या है? भारत के लिए यह सम्मेलन क्यों अहम होगा? आइये समझते हैं...
16वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन
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पहले जानते हैं कि आखिर ब्रिक्स है क्या?
यह अंग्रेजी अक्षरों BRICS से बना है। 'ब्रिक्स' दुनिया की उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं का एक समूह है। जैसा कि नाम से अनुमान लगाया जा सकता है, ये देश हैं - ब्राजील, रुस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका। ब्रिक्स के विचार की परिकल्पना वर्ष 2001 में की गई थी, जो 2006 में ब्रिक के रूप में सामने आई और 2010 में जब इस समूह में दक्षिण अफ्रीका शामिल हुआ, तो यह ब्रिक्स बन गया। अगस्त 2023 में दक्षिण अफ्रीका में हुए 15वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में लिए गए निर्णय के अनुसार अब समूह में 10 देश शामिल हैं। मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात नए पूर्ण सदस्य के रूप में ब्रिक्स में शामिल हुए हैं।
'ब्रिक' शब्दावली के जन्मदाता जिम ओ'नील हैं। अंतरराष्ट्रीय वित्तीय कंसलटेंसी गोल्डमैन सैक्स से जुड़े ओ'नील ने इस शब्दावली का प्रयोग सबसे पहले वर्ष 2001 में अपने शोधपत्र में किया था। उस शोधपत्र का शीर्षक था, 'बिल्डिंग बेटर ग्लोबल इकोनॉमिक ब्रिक्स'।
ब्रिक्स आज दुनिया की 43% आबादी, दुनिया के 32% भूमि क्षेत्र, वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 35% और विश्व निर्यात का 20% कवर करता है। समूह के अनुसार, यह पारस्परिक रूप से लाभकारी सहयोग विकसित करने के अवसर प्रदान करता है जो देशों के सतत विकास और वृद्धि में योगदान देता है।
ब्रिक्स सम्मेलन, रूस में पीएम मोदी
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ब्रिक्स के 16वें शिखर सम्मेलन का कार्यक्रम क्या है?
16वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी रूस द्वारा की जा रही है। 1 जनवरी को रूस को ब्रिक्स की अध्यक्षता सौंपी गई थी। 22-24 अक्तूबर के बीच यह सम्मेलन रूसी शहर कजान में हो रहा है। इस साल का विषय है 'न्यायसंगत वैश्विक विकास और सुरक्षा के लिए बहुपक्षवाद को मजबूत करना'।
सम्मेलन में पहले दिन यानी 22 अक्तूबर को सम्मेलन में भाग लेने वाले प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों के लिए अनौपचारिक लंच पर स्वागत समारोह का कार्यक्रम रखा गया।
दूसरे दिन कई कार्यक्रम रखे गए हैं। 23 अक्तूबर को ब्रिक्स प्रतिनिधिमंडल के प्रमुखों के साथ सामूहिक फोटो सत्र, 16वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की बंद कमरे में बैठक, सम्मेलन की विस्तारित प्रारूप बैठक, सम्मेलन में भाग लेने वाले प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों के लिए आधिकारिक बैठक समारोह और भव्य स्वागत शामिल है।
कार्यक्रम के अंतिम दिन की शुरुआत में आउटरीच/ब्रिक्स प्लस प्रारूप में 16वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने वाले प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों के साथ सामूहिक फोटो सत्र होगा। इसके बाद आउटरीच/ब्रिक्स प्लस प्रारूप में सम्मेलन का पहला और दूसरा पूर्ण सत्र आयोजित किया जाएगा। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की प्रेस कॉन्फ्रेंस के साथ 16वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की समाप्ति होगी।
ब्रिक्स सम्मेलन, रूस में पीएम मोदी
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सम्मेलन में कौन-कौन से देश शामिल होंगे?
रूसी राष्ट्रपति के विदेश नीति सलाहकार यूरी उशाकोव ने जानकारी दी है कि 36 देशों ने सम्म्मेलन में भागीदारी की पुष्टि की है। 20 से ज्यादा देश अपने राष्ट्राध्यक्ष भेजेंगे। उशाकोव ने कहा कि पुतिन के 20 द्विपक्षीय बैठकें करने की उम्मीद है और यह शिखर सम्मेलन रूसी धरती पर अब तक का सबसे बड़ा विदेश नीति कार्यक्रम बन सकता है।
ब्रिक्स सम्मेलन, रूस में पीएम मोदी
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कार्यक्रम में किन नेताओं की मौजूदगी होगी?
शिखर सम्मेलन के मौके पर, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, तुर्किये के राष्ट्रपति एर्दोआन, फलस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के साथ बैठक करेंगे। उशाकोव ने कहा कि बैठकें 22 अक्तूबर को शुरू होंगी। पुतिन की न्यू डेवलपमेंट बैंक की अध्यक्ष डिल्मा रूसेफ के साथ बैठक होगी। रूसेफ के साथ वार्ता के बाद, पुतिन पीएम मोदी और बाद में दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा के साथ बैठक करेंगे। इसके अलावा पुतिन की चीनी समकक्ष शी जिनपिंग और मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी के साथ भी बैठकों की योजना है।
उशाकोव ने कहा कि दूसरे दिन कई कार्य बैठकें होनी हैं। छोटी और लंबी बैठकों के बाद रूसी राष्ट्रपति और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और तुर्किये के राष्ट्रपति एर्दोगन के बीच बातचीत होगी। फिर पुतिन इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली से मिलेंगे। पुतिन का महमूद अब्बास के साथ बातचीत करने का कार्यक्रम है। वह अपने लाओस समकक्ष थोंगलौन सिसोउलिथ, मॉरिटानियाई राष्ट्रपति मोहम्मद औलद गज़ौनी और बोलीविया के राष्ट्रपति लुइस एर्से से भी मिलेंगे। यूरी उषाकोव ने कहा कि पुतिन एंटोनियो गुतेरेस और वियतनामी प्रधानमंत्री फाम मिन्ह से भी मिलेंगे।
रूस के राष्ट्रपति के साथ बैठक में बोले पीएम मोदी।
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सम्मेलन का एजेंडा क्या है?
16वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान, ब्रिक्स नेता पारस्परिक रूप से लाभकारी ब्रिक्स सहयोग, क्षेत्रीय और वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक विकास के साथ-साथ वैश्विक शासन सुधार की स्थिति पर विचार-विमर्श करेंगे। वे जोहान्सबर्ग में हुए पिछले सम्मेलन के दौरान मांगी गई रिपोर्टों पर विचार करेंगे। इसमें ब्रिक्स भागीदार मॉडल और संभावित उम्मीदवारों के आगे के विकास पर और स्थानीय मुद्राओं, भुगतान साधनों और प्लेटफार्मों पर विचार किया जाएगा। शिखर सम्मेलन में न्यू डेवलपमेंट बैंक, ब्रिक्स इंटरबैंक कोऑपरेशन मैकेनिज्म, ब्रिक्स बिजनेस काउंसिल और ब्रिक्स महिला बिजनेस एलायंस की रिपोर्ट पर भी चर्चा की जाएगी। समेलन में जिन मुद्दों पर बहस हो सकती है उनमें न्यू डेवलपमेंट बैंक (एनडीबी) और मुद्रा भी शामिल हैं। एनडीबी को आमतौर पर ब्रिक्स बैंक के रूप में जाना जाता है। न्यू डेवलपमेंट बैंक को 2015 में अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक के विकल्प के रूप में स्थापित किया गया था।
ब्रिक्स सम्मेलन, रूस में पीएम मोदी
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पीएम मोदी के रूस दौरे का कार्यक्रम क्या है?
प्रधानमंत्री मोदी शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए 22-23 अक्तूबर तक कजान में रहेंगे। भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी रूस की अध्यक्षता में कजान में आयोजित हो रहे 16वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के निमंत्रण पर 22-23 अक्तूबर 2024 तक रूस में हैं।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि अपनी यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री द्वारा ब्रिक्स सदस्य देशों के अपने समकक्षों और कजान में आमंत्रित नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें करने की भी उम्मीद है। यहां चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से पीएम मोदी की मुलाकात हो सकती है। पीएम मोदी और जिनपिंग के बीच बैठक से पहले भारत और चीन ने एक अहम कदम के रूप में सीमा विवाद सुलझाया है। भारत और चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर अप्रैल 2020 से पहले की तरह गश्त शुरू करने पर सहमत हो गए हैं। इस समझौते के मायने हैं कि दोनों देश लद्दाख में विवाद के बाकी बचे दो क्षेत्रों देपसांग-डेमचोक से भी सेनाओं को हटाएंगे। विवाद के चार अन्य क्षेत्र गलवां घाटी, उत्तर व दक्षिण पेंगोंग त्सो और गोगरा हॉट स्प्रिंग पर पहले ही समाधान निकल चुका है। गलवां घाटी में खूनी संघर्ष के साढ़े चार साल बाद ब्रिक्स सम्मेलन से पहले यह बड़ी सफलता है।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन
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भारत के लिए क्यों अहम है ब्रिक्स?
भारत ब्रिक्स को वैश्विक संतुलन, विविधता और बहुलता का एक अहम मंच मानता है। रूस रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने एक बयान में कहा, 'भारत ब्रिक्स के भीतर घनिष्ठ सहयोग को महत्व देता है, जो अनेक मुद्दों बातचीत और चर्चा के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में उभरा है। पिछले साल नए सदस्यों को जोड़ने के साथ ब्रिक्स के विस्तार ने इसकी समावेशिता और वैश्विक भलाई के एजेंडे को और मजबूत किया है।'
रूस में भारत के राजदूत विनय कुमार ने कहा कि भारत ब्रिक्स का संस्थापक सदस्य है और ब्रिक्स के ढांचे के भीतर आर्थिक सहयोग के लिए प्रतिबद्ध है। न्यूज एजेंसी एएनआई के साथ एक साक्षात्कार में कुमार ने कहा कि सम्मेलन में एजेंडे में भारत की तरफ से कुछ मुद्दे शामिल हैं, जिसमें आर्थिक सहयोग का और विस्तार, राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार समझौता, सतत विकास, विशेष रूप से जलवायु परिवर्तन की समस्याओं को दूर करने के लिए पीएम मोदी का LiFE मिशन, समाज के हाशिए पर पड़े वर्गों के डिजिटल समावेशन, वित्तीय समावेशन की दिशा में काम करना और भारत की कुछ उपलब्धियां शामिल हैं।