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भारत-अफ्रीका विजन: जयशंकर ने गिनाईं उपलब्धियां, विकसित भारत और एजेंडा 2063 से रिश्तों को मिलेगी नई रफ्तार

Wed, 05 Aug 2026 09:40 PM IST
राकेश कुमार एएनआई, नई दिल्ली।

सार

अफ्रीका दिवस 2026 के अवसर पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत-अफ्रीका संबंधों को लेकर बड़ा विजन पेश किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार 93 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है और भारत का निवेश 80 अरब डॉलर से अधिक है। जयशंकर ने विकास, रक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और वैश्विक दक्षिण में साझेदारी को मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई। 
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एस जयशंकर, विदेश मंत्री, भारत - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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विदेश मंत्री डॉक्टर एस जयशंकर ने अफ्रीका दिवस 2026 के अवसर पर भारत और अफ्रीका के ऐतिहासिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि भारत और अफ्रीका का रिश्ता हजारों वर्षों पुराना है, जो केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि संस्कृति, ज्ञान, दर्शन और जीवन मूल्यों के आदान-प्रदान पर भी आधारित रहा है। आज दोनों पक्ष समानता, विश्वास और साझा विकास के आधार पर वैश्विक दक्षिण (ग्लोबल साउथ) की मजबूत आवाज बनकर उभर रहे हैं।
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जयशंकर ने कहा कि 1963 में अफ्रीकी एकता संगठन (ओएयू) की स्थापना अफ्रीकी देशों की एकजुटता और स्वतंत्रता की आकांक्षाओं का महत्वपूर्ण पड़ाव थी। उन्होंने कहा कि भारत और अफ्रीका का रिश्ता इतिहास की गहराइयों से जुड़ा है। मानसूनी हवाओं ने सदियों तक भारतीय उपमहाद्वीप और अफ्रीका के बीच संपर्क का माध्यम बनकर दोनों क्षेत्रों को जोड़े रखा। इस दौरान दोनों समाजों ने वस्तुओं के साथ-साथ संस्कृति, भोजन, लोककथाएं, दर्शन और जीवन शैली भी साझा की।

क्या औपनिवेशिक दौर ने और मजबूत किया रिश्ता?
विदेश मंत्री ने कहा कि औपनिवेशिक शासन के दौरान भारत और अफ्रीका दोनों ने दमन और शोषण का सामना किया। इसी साझा संघर्ष ने दोनों क्षेत्रों के बीच गहरा भावनात्मक रिश्ता बनाया। उन्होंने याद दिलाया कि महात्मा गांधी ने दक्षिण अफ्रीका की धरती पर सत्याग्रह और अहिंसा के सिद्धांतों को विकसित किया, जिसने बाद में क्वामे नक्रूमा, जूलियस न्येरेरे और नेल्सन मंडेला जैसे अफ्रीकी नेताओं को प्रेरित किया। उन्होंने मंडेला का प्रसिद्ध कथन भी दोहराया, 'आपने हमें मोहनदास गांधी दिए, हमने आपको महात्मा लौटाया।'
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विकसित भारत 2047 और अफ्रीका एजेंडा 2063 का साझा लक्ष्य
विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद भारत और अफ्रीकी देशों ने संप्रभु और समान साझेदार के रूप में संबंधों को आगे बढ़ाया। भारत का 'विकसित भारत 2047' और अफ्रीका का 'एजेंडा 2063' दोनों क्षेत्रों के विकास का साझा विजन प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने कहा कि यह साझेदारी दक्षिण-दक्षिण सहयोग को भी नई मजबूती देती है।

पीएम मोदी के 'कंपाला सिद्धांत' बने भारत की नीति का आधार
विदेश मंत्री ने आगे यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2018 में युगांडा की संसद में भारत-अफ्रीका संबंधों के लिए 10 सिद्धांत पेश किए थे, जिन्हें 'कंपाला सिद्धांत' कहा जाता है। इन्हीं सिद्धांतों के आधार पर भारत मांग आधारित विकास सहयोग, व्यापार और निवेश, डिजिटल विकास, वैश्विक संस्थाओं में सुधार और मुक्त एवं समावेशी समुद्री व्यवस्था को बढ़ावा दे रहा है।

उन्होंने बताया कि पिछले 10 वर्षों में भारत और अफ्रीका के बीच 150 से अधिक उच्च स्तरीय दौरे हुए हैं। स्वयं उन्होंने विदेश मंत्री के रूप में 20 से ज्यादा बार अफ्रीकी देशों की यात्रा की है। भारत ने हाल के वर्षों में 17 नए दूतावास खोले हैं और अब 46 अफ्रीकी देशों में उसकी स्थायी राजनयिक उपस्थिति है।

93 अरब डॉलर का व्यापार, 80 अरब डॉलर से अधिक निवेश
जयशंकर ने कहा कि भारत आज अफ्रीका के सबसे बड़े व्यापार और निवेश साझेदारों में शामिल है। पिछले वर्ष दोनों पक्षों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 93 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। वहीं, भारत का अफ्रीका में कुल निवेश 80 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक हो चुका है। यह निवेश दूरसंचार, ऊर्जा, दवा उद्योग, बुनियादी ढांचे, कृषि और डिजिटल सेवाओं सहित कई क्षेत्रों में फैला हुआ है।

10 अरब डॉलर से ज्यादा की क्रेडिट लाइन, 220 परियोजनाएं पूरी
विदेश मंत्री ने बताया कि भारत ने अफ्रीका के 40 से अधिक देशों में 190 लाइन ऑफ क्रेडिट के माध्यम से 10 अरब अमेरिकी डॉलर से ज्यादा की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई है। इसके तहत अब तक 4.5 अरब डॉलर से अधिक की 220 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं। इसके अलावा 2015 से भारत ने 70 करोड़ अमेरिकी डॉलर की अनुदान सहायता भी दी है, जिसका उपयोग बुनियादी ढांचे, चिकित्सा सहायता, आपदा राहत और कृत्रिम अंग उपलब्ध कराने जैसी परियोजनाओं में किया गया है।

80 हजार से ज्यादा छात्रवृत्तियां और प्रशिक्षण
जयशंकर ने कहा कि मानव संसाधन विकास भारत-अफ्रीका संबंधों का प्रमुख आधार है। पिछले 11 वर्षों में भारत ने आईटीईसी, आईसीसीआर, सीवी रमन फेलोशिप और ई-वीबीएबी डिजिटल शिक्षा कार्यक्रमों के तहत 80 हजार से अधिक छात्रवृत्तियां और प्रशिक्षण अवसर उपलब्ध कराए हैं।

उन्होंने कहा कि अब सहयोग का नया चरण शुरू हो चुका है। तंजानिया के ज़ांज़ीबार में आईआईटी मद्रास का परिसर और युगांडा में नेशनल फॉरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी की स्थापना इसका बड़ा उदाहरण है।

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रक्षा और समुद्री सुरक्षा में भी बढ़ रहा सहयोग
विदेश मंत्री ने कहा कि अफ्रीका में शांति और सुरक्षा भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। भारत शांति मिशनों, रक्षा प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में अफ्रीकी देशों के साथ लगातार काम कर रहा है।

उन्होंने बताया कि भारतीय सैन्य प्रशिक्षण दल मोजाम्बिक, केन्या, युगांडा, तंजानिया और नामीबिया में क्षमता निर्माण कर रहे हैं। वहीं गैबॉन, गाम्बिया, गिनी, लाइबेरिया, माली, सिएरा लियोन, टोगो और नामीबिया के अधिकारी भारत के प्रशिक्षण कार्यक्रमों का लाभ उठा रहे हैं। भारत अफ्रीकी देशों के साथ कई बहुपक्षीय और द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास भी कर रहा है।

अफ्रीका के लिए एक करोड़ डॉलर के चिकित्सा उपकरण
जयशंकर ने घोषणा की कि भारत ने अफ्रीका सीडीसी और जोखिम वाले साझेदार देशों के लिए एक करोड़ अमेरिकी डॉलर मूल्य के चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराने का वादा किया है। इस प्रतिबद्धता के तहत अब तक तीन चरणों में सहायता भेजी जा चुकी है।
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'भारत और अफ्रीका मिलकर लिखेंगे भविष्य'
अपने संबोधन के अंत में विदेश मंत्री ने कहा कि अफ्रीका आज परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। उसकी युवा आबादी, प्राकृतिक संसाधन और उद्यमशीलता की क्षमता दुनिया के लिए बड़ी ताकत है। वहीं भारत भी नवाचार आधारित तेज विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि दोनों मिलकर वैश्विक दक्षिण और पूरी दुनिया के लिए एक बेहतर, टिकाऊ और समृद्ध भविष्य का निर्माण कर सकते हैं।
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