भारत और पाकिस्तान ने चार दिन के संघर्ष के बाद संघर्ष विराम का एलान किया, लेकिन कुछ घंटे बाद ही सीमा पर फिर से गोलीबारी और सीमावर्ती जिलों में ड्रोन घुसपैठ से हालात फिर से बिगड़ते दिखे। भारत ने सेना को किसी भी कार्रवाई का उसी तरीके से जवाब देने का आदेश दिया। हालांकि, देर रात के बाद शांति बहाल हुई। फिलहाल माहौल तनावपूर्ण है और संघर्ष विराम पर संशय बरकरार है।
इस बीच कूटनीतिक मैदान में इस सीजफायर पर सवाल उठने लगे। धारणा की लड़ाई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार पर पिछड़ने का आरोप लगाया जाने लगा। कहा जाने लगा कि संघर्ष विराम से पहले उसने वह मकसद हासिल नहीं किया, जिसके लिए यह पूरा संघर्ष शुरू हुआ था। इस बीच सूत्रों के हवाले से सरकार का जवाब भी सामने आने लगा।
चाहे सीजफायर से पहले आतंक और पाकिस्तान की कमर तोड़ने की बात हो या फिर कश्मीर के मुद्दे पर डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता की पेशकश हो, हर दावों का जवाब सामने आया। इसके साथ यह भी बताया गया कि पाकिस्तान से धारणा की लड़ाई में भी भारत कभी नहीं पिछड़ा। आइए जानते हैं विस्तार से...
'भारत ने स्पष्ट संदेश दिया कि आतंकी कहीं भी सुरक्षित नहीं'
समाचार एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से बताया कि हर दौर में पाकिस्तान के लिए स्थिति खराब होती गई। वे लड़ाई के हर दौर में भारत से हार गए। पाकिस्तान के हवाई ठिकानों पर हमारे हमलों के बाद पाकिस्तान को एहसास हो गया कि वे इस संघर्ष में कहीं नहीं टिकने वाले हैं। भारत ने स्पष्ट संदेश दिया कि अब कुछ भी सुरक्षित नहीं है। यह नया दौर है और अब यही आम बात है।
भारत ने ऑपरेशन सिंदूर चलाकर तीनों लक्ष्य हासिल किए-
- सैन्य उद्देश्य- पीएम मोदी ने कहा था कि मिट्टी में मिला देंगे, तो बहावलपुर, मुरीदके और मुजफ्फराबाद कैंप को मिट्टी में मिला दिया।
- राजनीतिक उद्देश्य- सिंधु जल संधि सीमा पार से जुड़ी है। पाकिस्तान आतंकवाद का पनाहगार है। जब तक सीमा पार से आतंकवाद बंद नहीं हो जाता, तब तक यह स्थगित रहेगी।
- मनोवैज्ञानिक उद्देश्य- 'घुस कर मारेंगे', हमने उनके दिल में गहरी चोट पहुंचाई। हम बहुत सफल रहे।
'अब हम छोटे शिविरों पर हमला नहीं करेंगे'
सूत्रों के मुताबिक, आईएसआई से करीबी तौर पर जुड़े मुरीदके, बहावलपुर के आतंकी शिविरों पर हमला करने के बाद भारत ने जो संदेश दिया है, वह यह है कि हमने अपनी नजरें बंद नहीं की हैं। हम आपको मुख्यालय में भी मार सकते हैं। अब हम छोटे शिविरों पर हमला नहीं करेंगे। भारत ने दुनिया को यह स्पष्ट कर दिया है कि आप पीड़ितों और अपराधियों की बराबरी नहीं कर सकते।
रहीमयार खान और चकलाला एयरबेस का रनवे तबाह
बताया गया कि हमले बहुत ही सटीकता से किए गए। पाकिस्तान में रहीमयार खान एयरबेस का रनवे पूरी तरह से समतल हो गया था। चकलाला स्थित पाकिस्तानी वायुसेना बेस नूर खान पर भी बुरा हाल हुआ। तकनीकी और सैन्य क्षमताओं के बीच बड़ा अंतर था। भारत और पाकिस्तान के बीच बहुत बड़ा अंतर था। पाकिस्तान को एहसास हो गया था कि वे उस श्रेणी में नहीं हैं। भारत ने अपनी मर्जी से जवाबी प्रहार किया और पाकिस्तान के हमलों को नाकाम कर दिया गया। पाकिस्तान को कोई संदेह नहीं होना चाहिए।
'पीओके की वापसी ही एकमात्र विषय'
सूत्रों के मुताबिक, कश्मीर पर हमारी स्थिति बहुत स्पष्ट है। अब केवल एक ही मामला बचा है- पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) की वापसी। इसके अलावा और कोई बात नहीं है। अगर वे आतंकवादियों को सौंपने की बात करते हैं तो हम बात कर सकते हैं। हमारा किसी और विषय पर कोई इरादा नहीं है। हम नहीं चाहते कि कोई मध्यस्थता करे। हमें किसी की मध्यस्थता की जरूरत नहीं है।