भारत औपचारिक तौर पर पेरिस जलवायु परिवर्तन समझौते में शामिल हो गया है। न्यूयॉर्क स्थित यूएन हेडक्वार्टर में महात्मा गांधी की जयंती पर आयोजित एक समारोह में भारत ने समझौते को मंजूर करने के समर्थन में इंस्ट्रूमेंट ऑफ रेटिफिकेशन सौंप दिए। पीएम नरेंद्र मोदी ने समझौते में शामिल होने की खबर पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि पर्यावरण की चिंता और देखभाल भारतीय मूल्य का अभिन्न हिस्सा हैं। भारत जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए हरसंभव कदम उठाएगा क्योंकि इसने पेरिस जलवायु समझौते का समर्थन किया है।
गांधी जयंती के दिन इस समझौते में औपचारिक रूप से शामिल होकर भारत ने दुनिया को संसाधनों की बरबादी रोकने का संदेश दिया है। गांधी जी ऐसी सादा जीवनशैली के पैरोकार थे, जो पर्यावरण पर दबाव न डाले। जाहिर है इस जीवनशैली से कम ग्रीन हाउस उत्सर्जन होता है।
रविवार को इंस्ट्रूमेंट ऑफ रेटिफिकेशन यूएन में भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने सौंपे। भारत अब मोरक्को के मराकेश में 7 नवंबर को आयोजित होने वाले क्लाइमेट कांफ्रेंस में (सीओपी22) जलवायु परिवर्तन से जुड़े मुद्दों पर अपनी दलीलों को मजबूती से पेश करेगा।
समझौैते में शामिल होने की घोषणा के बाद पर्यावरण मंत्री अनिल माधव दवे ने कहा भारत ने पेरिस समझौते में क्लाइमेट जस्टिस और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाने वाली जीवनशैली का मुद्दा शामिल कराने की कोशिश में अग्रणी भूमिका निभाई है।
भारत इस समझौते में शामिल होने वाला 62वां देश बन गया है
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दवे ने कहा कि कार्बन उत्सर्जन में कटौती पर रजामंदी कायम करने के बाद इसमें ज्यादा से ज्यादा भागीदारी सुनिश्चित करने की कोशिश ज्यादा अहम है। हम कोशिश करेंगे कि ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन की कवायद में ज्यादा से ज्यादा देश शामिल हों। यह सचाई है कि विकसित देश ज्यादा कार्बन फुटप्रिंट के साथ आलीशान जीवन जी रहे हैं।
28 यूरोपीय देशों के संगठन यूरोपीय यूनियन ने भी मंगलवार को इंस्ट्रूमेंट ऑफ रेटिफिकेशन का फैसला किया है। सीओपी 22 यानी मराकेश में सम्मेलन से पहले यह समझौता लागू हो जाएगा। इसके तहत इन देशों को समझौते के नियम-कानून तय करने का मौका मिलेगा। इससे 2020 के बाद ग्रीन हाउस उत्सर्जन में कटौती करने के कदमों पर विचार होगा।
भारत की ओर से समझौते में शामिल होने के कदम उठाने के बाद संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने कहा कि भारत के इस रुख से ग्रीन हाउस उत्सर्जन में कटौती के लक्ष्य को पाने में काफी मदद मिलेगी। भारत इस समझौते में शामिल होने वाला 62वां देश बन गया है। भारत समेत इन सभी देशों की कार्बन उत्सर्जन की हिस्सेदारी 52 फीसदी तक पहुंच गई है, जो उत्सर्जन सीमा से तीन फीसदी कम है। यूरोपीय यूनियन के शामिल होने के 30 दिनों बाद समझौता लागू हो जाएगा।
भारत जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए हरसंभव कदम उठाएगा
बराक ओबामा का ट्वीट-गांधीजी ऐसी दुनिया में विश्वास करते थे, जो हमारे बच्चों के रहने लायक बनी रहे। पेरिस समझौते में शामिल होकर नरेंद्र मोदी और भारत के लोगों ने उनकी इस विरासत को ही आगे बढ़ाया है।
नरेंद्र मोदी, पीएम-भारत जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए हरसंभव कदम उठाएगा क्योंकि इसने पेरिस जलवायु समझौते का समर्थन किया है।
अनिल माधव दवे, पर्यावरण मंत्री-भारत ने पेरिस समझौते में क्लाइमेट जस्टिस और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाने वाली जीवनशैली का मुद्दा शामिल कराने की कोशिश में अग्रणी भूमिका निभाई है।
बान की मून संयुक्त राष्ट्र महासचिव-भारत के इस कदम से ग्रीन हाउस उत्सर्जन में कटौती के लक्ष्य को पाने में काफी मदद मिलेगी।-
पेरिस जलवायु समझौता 2015
ग्लोबल वार्मिंग को औद्योगिक क्रांति के पूर्व के स्तर से दो डिग्री सेल्सियस ज्यादा पर सीमित करने पर रजामंदी।
समझौते पर 197 देशों के बीच विचार-विमर्श हुआ। समझौते पर 191 देशों ने हस्ताक्षर किए।
भविष्य में भी कम कार्बन उत्सर्जन हो इसके लिए कदम उठाने और फंड जुटाने पर जोर।
भारत का वादा
2030 तक उत्सर्जन तीव्रता 33 फीसदी घटाएगा।
2030 तक 40 फीसदी बिजली गैर जीवाश्म ईंधन स्त्रोतों से पैदा होगी।
2.5 से 3 अरब टन का अतिरिक्त कार्बन सिंक बनाया जाएगा।