गुजरात में निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवाणी और कांग्रेस के 14 विधायकों को विधानसभा अध्यक्ष ने हंगामे के बीच दिन भर के लिए निलंबित कर दिया। विधायकों को मार्शलों की मदद से सदन से बाहर निकाला गया। कांग्रेस के जिन विधायकों को निलंबित किया गया, उनमें इमरान खेडावाला, गेनीबेन ठाकोर, अमरीश डेर, पूना गमित, बाबू वाजा, नौशाद सोलंकी और प्रताप दुधात शामिल हैं।
बताया जा रहा है कि जैसे ही विधानसभा की कार्यवाही शुरू हुई, नेता विपक्ष सुखराम राठवा ने आंदोलनरत सरकारी कर्मचारियों, किसानों, आंगनवाड़ी कर्मियों और भूतपूर्व सैनिकों से संबंधित मुद्दों पर आधे घंटे की विशेष चर्चा की मांग की। विधानसभा की अध्यक्ष नीमाबेन आचार्य ने राठवा की मांग को मानने से इनकार कर दिया।
इसके बाद मेवाणी और कांग्रेस के अन्य विधायक आसन के पास आ गए और नारे लगाने लगे। इस बीच विपक्ष के उप नेता शैलेश परमार ने पूछा कि जब लगभग सभी विभाग के इतने सारे कर्मचारी अपने-अपने लंबित मामलों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं, भाजपा सदन में इन मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार क्यों नहीं है?
विधानसभा अध्यक्ष ने बार-बार विधायकों को अपनी सीट पर जाने को कहा। जब विधायकों ने उनकी बात नहीं मानी तो गुजरात के विधायी और संसदीय कार्य मंत्री राजेंद्र त्रिवेदी ने आसन के समक्ष बैठे विधायकों के निलंबन का प्रस्ताव पेश किया। प्रस्ताव को ध्वनि मत से मंजूरी दी गई।
इस कार्रवाई के बाद कांग्रेस के कम से कम 30 विधायकों ने दोपहर में कार्यवाही शुरू होने के कुछ मिनट बाद ही सदन से बहिर्गमन किया। गुजरात के मौजूदा विधानसभा के दो दिवसीय सत्र को चुनाव से पहले आखिरी माना जा रहा है क्योंकि अगले कुछ महीनों में यहां चुनाव होने हैं।
आवारा पशुओं से जुड़ा विधेयक वापस
पशुपालकों के भारी विरोध के चलते गुजरात विधानसभा ने बुधवार को सर्वसम्मति से उस विधेयक को वापस ले लिया, जिसमें मवेशियों की शहरी सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर आवाजाही प्रतिबंधित करने का प्रस्ताव था। इस विधेयक को कई महीने पहले विधानसभा ने पारित किया था।