त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक शाह और सिक्किम मुख्यमंत्री पीएस तमांग ने अपने-अपने राज्य में सोमवार को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर तिरंगा फहराया। इस दौरान शाह ने असम राइफल्स ग्राउंड में और तमांग ने दक्षिण सिक्किम में नामची जिले के बाईचुंग स्टेडियम में आयोजित एक कार्यक्रम में जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान तमांग ने भारत की आजादी के बाद की प्रगति और विकास पर प्रकाश डाला।
मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि वे देशभक्ति का प्रतीक हैं और हम उनके धीरज और निस्वार्थ बलिदान के आजीवन ऋणी हैं, जिससे हमें अपनी स्वतंत्रता प्राप्त हुई है। तमांग ने कहा कि हिमालयी राज्य और यहां के लोगों ने विकास की अपार सफलता हासिल की है। उन्होंने जीवन स्तर में सुधार, बुनियादी संरचना का निर्माण और स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन, कृषि और डेयरी क्षेत्र में विकास कार्यों की प्रशंसा की।
उन्होंने कहा कि हमने बड़ी बाधाओं को पार करते हुए मील का पत्थर हासिल किया है। हमारा लक्ष्य राज्य को देश में एक उत्कृष्ट राज्य के रूप में स्थापित करना, मजबूत करना और नयी ऊंचाइयों तक ले जाना है। उन्होंने कहा, उनकी सरकार ने पशुधन और किसानों की आय बढ़ाने पर बल दिया है।
त्रिपुरा में ब्रू समुदाय को मिला उपहार
असम राइफल्स ग्राउंड में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर तिरंगा फहराने के बाद त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक शाह ने कहा कि अगरतला (भारत)- अकाहुरा (बांग्लादेश) रेलवे लाइन का काम जारी है और भारत में इसका काम अगले साल के जून तक खत्म हो जाएगा। नार्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे (एनएफआर) अभी 967.5 करोड़ रुपये की लागत वाला 12.07 किमी लंबा रेलवे लाइन बिछा रहा है।
उन्होंने यह भी बताया कि दक्षिणी त्रिपुरा के सबरूम में विशेष आर्थिक क्षेत्र का भी गठन हो रहा है। चिट्टागोंग अंतरराष्ट्रीय समुद्री बंदरगाह का इस्तेमाल कर अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ाया जाएगा। यह बंदरगाइ सबरूम से केवल 72 किमी की दूरी पर है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे महिलाओं को सशक्त किया जा सकेगा। मिजोरम से विस्थापित रियांग जनजाति समुदाय को त्रिपुरा ने आश्रय दिया है। मुख्यमंत्री माणिक शाहा ने सोमवार को इसकी जानकारी दी है।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने आर्थिक तौर पर 37,136 रियांग आदिवासियों को बसाया है। इसके लिए केंद्र ने 600 करोड़ रुपये का पैकेज आवंटित किया है। रियांग समुदाय के महिलाओं और बच्चों को त्रिपुरा में रहने के लिए जगह मुहैया कराई गई है। साल 1997 में हुए जनजातिय तनाव के कारण ये सभी अपने राज्य से भागकर त्रिपुरा पहुंचे थे।
उल्लेखनीय है कि ब्रू समुदाय पूर्वोत्तर भारत में त्रिपुरा, मिजोरम और बांग्लादेश के चटगांव पहाड़ी क्षेत्र में रहने वाला एक जनजातीय समूह है। इस समुदाय के लोगों की भाषा ब्रू है। त्रिपुरा में इस समुदाय को एक अलग जाति समूह रियांग तथा मिजोरम में अनुसूचित जनजाति का एक समूह माना जाता है।