भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के 14 अधिकारियों को स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर उत्कृष्ट और विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति के पदक से नवाजा गया है। उप कमांडेंट और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी देवेंद्र पाल (विशिष्ट सेवा) और 51वीं बटालियन के कमांडर एम एस गुलेरिया (उत्कृष्ट सेवा) समेत अन्य को पदक दिया गया है।
तकरीबन 90,000 की क्षमता वाले शक्तिशाली बल का पहला का काम 3,488 किलोमीटर लंबी भारत-चीन सीमा की रखवाली करना है। इसके अलावा यह नक्सल रोधी अभियानों समेत अन्य आंतरिक सुरक्षा ड्यूटी भी निभाता है।
सरकार ने 72 वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर आज राज्य पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों के कुल 972 कर्मियों को सेवा पदक देने की घोषणा की। सेवा के दौरान शहादत देने वाले कश्मीर के सीआरपीएफ के दो जवानों को देश का शीर्ष पुलिस वीरता पुरस्कार, राष्ट्रपति पुलिस वीरता पदक (पीपीएमजी) दिया गया।
कांस्टेबल शरीफुद्दीन गनई और हेड कांस्टेबल मोहम्मद तफैल को मरणोपरांत पीपीएमजी दिया गया जबकि सीआरपीएफ के 89 अन्य कर्मियों को आतंकवाद प्रभावित जम्मू-कश्मीर में और विभिन्न राज्यों में नक्सल रोधी अभियानों में अदम्य साहस का परिचय देने के लिए पुलिस वीरता पदक से सम्मानित किया गया।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) को इस साल मिले पदक अब तक के सर्वाधिक हैं। सीआरपीएफ के बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस को सबसे ज्यादा 37 पुलिस वीरता पदक मिले। इसके बाद ओडिशा पुलिस को 11, सीमा सुरक्षा बल को 10, महाराष्ट्र पुलिस को आठ, छत्तीसगढ़ पुलिस को छह पुलिस वीरता पदक मिले।