स्वतंत्रता दिवस विशेष: 20 फरवरी 1947, वो तारीख जिसने भारत का भविष्य तय कर दिया, लेकिन बंटवारे के दर्द से देश कराह उठा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Sun, 15 Aug 2021 12:19 PM IST
सार
- ब्रिटेन के प्रधानमंत्री क्लीमेंट एटली ने भारत को आजाद करने का एलान किया और इसकी जिम्मेदारी लॉर्ड माउंटबेटन को सौंपी गई।
- माउंटबेटन ने एक योजना तैयार की, जिसे 3 जून प्लान कहा गया। इसके तहत भारत की आजादी के लिए बंटवारे को जरूरी बताया गया
स्वतंत्रता दिवस 2021: आजादी का इतिहास
- फोटो : Amar Ujala
भारत आज अपनी आजादी के 75वें साल में कदम रख रहा है। इस आजादी को पाने के लिए लाखों देशभक्तों ने अपनी जान कुर्बान की। पुराने समय में पूरी दुनिया के लोग भारत आने के लिए उत्सुक रहा करते थे। फारसियों के बाद ईरानी और फिर पारसी भारत में आकर बस गए। उनके बाद मुगल आए और उन्होंने भारत को अपना घर बना लिया। चंगेजखान, अलेक्जेंडर महान भी भारत पर विजय पाने के लिए आए, कामयाब नहीं हो सके। यहां फ्रांसीसी लोग भी आए और भारत में अपनी कॉलोनियां बनाईं।
अंत में ब्रिटिश आए और उन्होंने काफी लंबे समय तक भारत को गुलामी की जंजीरों में बांधे रखा। लाखों वीरों के बलिदान के बाद के बाद अंग्रेज भारत को आजाद करने के लिए मजबूर हुए। हालांकि, इस आजादी के लिए देश को भारी कीमत चुकानी पड़ी। 14 अगस्त 1947 को ही देश का बंटवारा हुआ और हिंदुस्तान दो हिस्सों में विभाजित हो गया। भारत और पाकिस्तान। 14 अगस्त को पाकिस्तान अपना स्वतंत्रता दिवस मनाता है।
स्वतंत्रता दिवस 2021: आजादी का इतिहास
- फोटो : Amar Ujala
भारत आज अपनी आजादी के 75वें साल में कदम रख रहा है। इस आजादी को पाने के लिए लाखों देशभक्तों ने अपनी जान कुर्बान की। पुराने समय में पूरी दुनिया के लोग भारत आने के लिए उत्सुक रहा करते थे। फारसियों के बाद ईरानी और फिर पारसी भारत में आकर बस गए। उनके बाद मुगल आए और उन्होंने भारत को अपना घर बना लिया। चंगेजखान, अलेक्जेंडर महान भी भारत पर विजय पाने के लिए आए, कामयाब नहीं हो सके। यहां फ्रांसीसी लोग भी आए और भारत में अपनी कॉलोनियां बनाईं।
अंत में ब्रिटिश आए और उन्होंने काफी लंबे समय तक भारत को गुलामी की जंजीरों में बांधे रखा। लाखों वीरों के बलिदान के बाद के बाद अंग्रेज भारत को आजाद करने के लिए मजबूर हुए। हालांकि, इस आजादी के लिए देश को भारी कीमत चुकानी पड़ी। 14 अगस्त 1947 को ही देश का बंटवारा हुआ और हिंदुस्तान दो हिस्सों में विभाजित हो गया। भारत और पाकिस्तान। 14 अगस्त को पाकिस्तान अपना स्वतंत्रता दिवस मनाता है।
सबसे पहले 20 फरवरी 1947 को अंग्रेजों से आजादी का एलान
अंग्रेजों के देश छोड़ने का आधिकारिक सिलसिला 20 फरवरी 1947 से शुरू हुआ। इसी दिन ब्रिटेन के प्रधानमंत्री क्लीमेंट एटली ने भारत को आजाद करने का एलान किया और इसकी जिम्मेदारी लॉर्ड माउंटबेटन को सौंपी गई। माउंटबेटन ने एक योजना तैयार की, जिसे 3 जून प्लान भी कहा जाता है। इस योजना के तहत भारत के हालात को देखते हुए केवल बंटवारा ही विकल्प बताया गया। यानी भारत को आजादी तो मिलेगी, लेकिन उसका बंटवारा भी किया जाएगा। भारत और पाकिस्तान के बॉर्डर के फैसले की जिम्मेदारी लंदन के वकील सर सिरिल रैडक्लिफ को सौंपी गई। हिंदू बहुमत वाले इलाके भारत में और मुस्लिम बहुमत वाले इलाके पाकिस्तान में शामिल किए गए।
18 जुलाई 1947 को बंटवारे पर ब्रिटिश संसद ने मुहर लगाई
इस योजना के तहत रियासतों को भी सुविधा दी गई कि वे भारत या पाकिस्तान के साथ जाने का खुद फैसला कर सकते हैं। उन्हें स्वतंत्र रहने का भी विकल्प दिया गया। इसके बाद 18 जुलाई 1947 को ब्रिटिश संसद ने इस बिल को पास कर दिया। इसी के साथ भारत की स्वतंत्रता और बंटवारे पर अंग्रेजी संसद की मुहर लग गई। तब भारतीय नेताओं के पास बंटवारे के साथ आजादी कबूल करने के अलावा कोई रास्ता नहीं था, क्योंकि मुस्लिम लीग अपनी अलग देश की मांग पर अड़ी हुई थी। इस तरह 14 अगस्त 1947 की आधी रात को भारत आजाद हुआ। तब से हर साल भारत 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाता है। जवाहर लाल नेहरू स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री बने।
दंगे-फसाद ने ली लाखों जानें
भारत-पाकिस्तान बंटवारे पर अंग्रेजी रवैये को लेकर विद्वान एक सुर में गलत बताते हैं। उनका मानना है कि ब्रिटिश सरकार ने विभाजन की प्रक्रिया को ठीक से नहीं संभाला। इसके पीछे उनका तर्क है कि देश की आजादी की घोषणा पहले की गई और बंटवारे का एलान बाद में। इस वजह से देश में शांति कायम रखने की जिम्मेदारी भारत और पाकिस्तान की नई सरकारों पर आ गई। किसी ने यह नहीं सोचा था कि बहुत से लोग भारत से पाकिस्तान या पाकिस्तान से भारत की ओर जाना शुरू कर देंगे। इसके परिणामस्वरूप दोनों देशों ने दंगे-फसाद के रूप में शायद सबसे बड़ी त्रासदी झेली। लाखों लोगों की जानें गईं और कइयों को घर छोड़कर जाना पड़ा। कई कभी लौटकर नहीं आए।
नेहरू ने आजादी का एलान किया
भारत की आजादी का एलान करते हुए प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने कहा था कि आधी रात में जब दुनिया सो रही होगी, हिंदुस्तान जीवन और आजादी के लिए जाग उठेगा। एक ऐसा क्षण जो इतिहास में मुश्किल से ही आता है, जब हम नई दुनिया में कदम रखेंगे। जब एक युग का अंत होगा और जब राष्ट्र की आत्मा लंबे समय तक गुलामी में रहने के बाद अपनी आवाज दोबारा पा सकेगी। हम आज दुर्भाग्य का एक युग समाप्त कर रहे हैं और भारत अपनी दोबारा खोज आरंभ कर रहा है।