दुनिया तेजी से विकास कर रही है और इसी के साथ कई ऐसी समस्याएं भी बढ़ रही हैं जो मानवता के अस्तित्व के लिए खतरा बन सकती हैं। वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण और भूमि प्रदूषण के साथ ही पिछले कुछ दशकों में तापमान और जल संकट बेहद बड़ी समस्या बनकर सामने आए हैं। दुनिया के कई ऐसे देश हैं, जहां गर्मी और जल संकट की वजह से लोग पलायन कर चुके हैं। लेकिन दुनिया ही क्यों, हमारे देश भारत में भी ऐसे क्षेत्र और राज्य हैं, जहां सूखा और पानी की कमी के चलते मौत सा सन्नाटा पसरा हुआ है। बुंदेलखंड और उड़ीसा में ऐसे कई क्षेत्र हैं। हाल के वर्षों में जल संकट कई और राज्यों में फैला है। देश की राजधानी दिल्ली सहित मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्रप्रदेश ऐसे प्रमुख सूबे हैं, जहां तेजी से पानी की समस्या सिर उठा रही है।
पानी की कीमत क्या होती है, यह आपको भयंकर सूखे की मार झेल चुके महाराष्ट्र के लातूर जिले के बाशिंदों से पता चल सकता है। दो साल पहले इस जिले में पानी की ऐसी किल्लत हुई थी जिसका अंजाम खून-खराबे तक पहुंच गया था। जिन लोगों के पास पानी था, वो खुद को भगवान से कम नहीं मान रहे थे। किल्लत दूर करने के लिए भारतीय रेल से पानी के टैंकर मंगाए गए थे। रोजाना दस टैंकर वाली ट्रेन से इलाके की प्यास बुझाने का इंतजाम किया गया था। लातूर जिला समुद्र तल से 666 मीटर की ऊंचाई पर बसा होने के कारण हमेशा पानी की किल्लत झेलता है। इस किल्लत की सबसे बड़ी वजह कम बारिश और मांजरा डैम का गिरता जल-स्तर है।
इन सबके बीच कुछ राज्य तो ऐसे हैं कि जहां की महिलाएं बूंद-बूंद पानी के लिए 12 से 25 किलोमीटर तक की दूरी तय कर रही हैं। देश के पूर्व से लेकर पश्चिम तक, उत्तर से लेकर दक्षिण तक पूरा भारत पानी के लिए तरस रहा है। दिल्ली के कई क्षेत्रों में दो दिनों में एक बार टैंकरों से पानी पहुंचाया जा रहा है लेकिन यह नाकाफी है। द्वारका जैसे हाईफाई इलाके से लेकर, संगम विहार, मदनगीर, बसंत कुंज, सीमापुरी, बुराड़ी, छतरपुर के गांव तक पीने के पानी की किल्लत से जूझ रहे हैं।
असल में, पानी का यह संकट और बढ़ेगा। देश के 91 जलाशयों में अब महज 20 फीसदी पानी बचा है और उनमें से 77 में जलस्तर 40 फीसदी या कम बचा है। यह आंकड़े केंद्रीय जल आयोग ने जारी किए हैं। इन जलाशयों में पानी का स्तर लगातार गिर रहा है और यह बात केंद्रीय जल आयोग के पिछले तीन महीने के आंकड़ों से साबित होती है। 10 मई को 77 जलाशयों में जलस्तर इसकी सामान्य क्षमता (फुल रिजर्वॉयर लेवल यानी एफआरएल) के 40 या उससे कम तक पहुंच गया है। सात दिन पहले ऐसे जलाशयों की संख्या 73 थी। दो महीने पहले 40 फीसदी वाले जलाशयों की संख्या 60 फीसदी थी अब देश के 85 फीसदी जलाशय इस वर्ग में आ गए हैं।
देश के 18 राज्यों में मौजूद जलाशयों में पिछले तीन महीनों में लगातार पानी के स्तर में कमी आ रही है। हिमाचल, उत्तराखंड, तमिलनाडु और तेलंगाना में इसका सबसे अधिक असर है और आंकड़े बात रहे हैं कि पूर्व की तरफ बहने वाली नदियों और बेसिन के लिहाज से तापी, सिंधु, कृष्णा और कावेरी नदियों के जलाशयों पर सबसे बुरा असर दिख रहा है।