दुनिया की कुल आबादी में 1.4 अरब यानी करीब 18% हिस्सेदारी के साथ भारत असल में एक पॉवरहाउस में तब्दील हो चुका है। माना जा रहा है कि लगातार बढ़ती आबादी भारत के लिए किसी आपदा की बजाय आर्थिक विकास को गति देने वाली साबित होगी। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि एक तरफ जहां तमाम देशों की आबादी तेजी से बूढ़ी हो रही और पर्याप्त श्रम बल की उपलब्धता उनके लिए चुनौती बन रही है, वहीं भारतीय आबादी में दो-तिहाई से ज्यादा हिस्सेदारी कामकाजी आयु वर्ग के लोगों की है।
आंकड़ों पर गौर करें तो भारत की 1.4 अरब आबादी में से एक अरब के करीब हिस्सेदारी कामकाजी आयु वर्ग की है। अनुमान यह भी बताते हैं कि 2030 तक भारत न्यूनतम निर्भरता अनुपात (यानी 15 वर्ष से कम और 65 वर्ष से अधिक आयु वर्ग) वाला देश बन जाएगा और यह अनुपात 31.2 % होगा। 2056 तक आते-आते 15 वर्ष से कम आयु वर्ग की आबादी का अनुपात 65 वर्ष की आयु वाले लोगों की तुलना में ज्यादा हो जाएगा। औसतन अधिक युवा आबादी वाला भारत न केवल अपनी बल्कि दुनियाभर की मानव संसाधन की जरूरतों को पूरा करने वाला देश बन सकता है। इससे भारत के आर्थिक विकास को तो गति मिलेगी, बल्कि वह पूरी दुनिया के विकास में भी खासा योगदान दे सकता है।
प्रमुख देशों की तुलना में भारत अधिक 'युवा'
भारत में 26 फीसदी आबादी 14 वर्ष से कम उम्र की है और करीब 67 फीसदी 15 से 64 आयु वर्ग की है। इस तरह भारतीय आबादी की औसत आयु 28.4 वर्ष है जो अन्य प्रमुख देशों की तुलना में काफी कम है। उदाहरण के तौर पर जापान में औसत आयु 48.6 वर्ष है, अमेरिका में 38.5 वर्ष और चीन में 38.4 वर्ष। यह आंकड़ा बताता है कि अन्य प्रमुख देशों की तुलना में भारत अधिक युवा है।
अगला दशक भारतीय श्रमबल के नाम होगा.. विकसित देशों की आबादी जहां तेजी से बूढ़ी हो रही है, वहीं भारत में 26 फीसदी आबादी 14 वर्ष से कम होना दर्शाता है कि अगले कुछ सालों में यहां कामकाजी आयुवर्ग की आबादी तेजी से बढ़ेगी। एक अनुमान के मुताबिक, अगले एक दशक में वैश्विक स्तर पर श्रम बल के मामले में भारतीय भागीदारी 24.3 फीसदी हो जाएगी जो, विश्व में सबसे बड़े मानव संसाधन प्रदाता के तौर पर उसकी स्थिति को और मजबूत करेगा।
भारत में सकल पंजीकरण अनुपात (जीईआर) और श्रम बल में महिला भागीदारी की दर (एलएफपीआर) दोनों के संदर्भ में नारी शक्ति बढ़ रही है। पिछले कुछ सालों के दौरान श्रम बल में महिलाओं की व्यापक हिस्सेदारी बढ़ने के संकेत हैं। उच्च शिक्षा में कुल नामांकन में 49% महिलाओं की भागीदारी इसी की पुष्टि करती है।
इन सेक्टर पर दिया जा रहा खास जोर
श्रम बल के बड़े पूल के साथ भारत न केवल घरेलू स्तर पर बल्कि दुनियाभर में कुशल और सक्षम मानव संसाधन मुहैया कराने के लिए पूरी तरह तैयार है। मुख्य तौर पर कंस्ट्रक्शन, पब्लिक सर्विसेज, श्रम आधारित मैन्युफैक्चरिंग के अलावा ट्रेड, ट्रांसपोर्ट, पर्यटन और ई-कॉमर्स सेवाओं पर खास जोर है। इसके लिए सरकार की पहल पर कुशल और प्रशिक्षित श्रम बल के लिए राष्ट्रीय कौशल विकास मिशन, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना जैसे कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।