इस दौरान मरीजों को ज्यादा पानी पीने की सलाह दी जाती है।
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कुछ समय पहले तक देश में अंगदान के लिए लोग आगे नहीं आते थे, लेकिन जागरूकता बढ़ने के कारण लोग अब आगे बढ़कर अंगदान कर रहे हैं। इतना ही नहीं लाइव किडनी डोनेशन में भारत ने अब अमेरिका को भी पीछे छोड़ दिया है। राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (नोटो) की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। एक ब्रेन डेड व्यक्ति यदि अंगदान करता है, तो उससे 10 लोगों को जीवनदान मिलता है।
नोटो के अनुसार वर्ष 2013 से 2016 के बीच देश में दिल के प्रत्यारोपण 10 गुना बढ़े हैं, जबकि किडनी और लिवर दान में भी तीन गुना वृद्धि हुई है। वर्ष 2016 में अंगदान की संख्या बढ़कर 807 हो गई है। नोटो के निदेशक डॉ. विमल का कहना है कि तमिलनाडु और महाराष्ट्र दो ऐसे राज्य हैं जो अंगदान में सर्वश्रेष्ठ कार्य कर रहे हैं। डॉ. भंडारी ने बताया कि 2017 में लगभग 9 हजार जीवित लोगों से किडनी डोनेशन हुए हैं। अभी जागरूकता की और जरूरत है।
उत्तर प्रदेश फिसड्डी
अंगदान और प्रत्यारोपण करने वाले राज्यों की सूची में 12 राज्यों में उत्तर प्रदेश सबसे निचले पायदान पर है। वर्ष 2016 में राज्य में 22 ही प्रत्यारोपण हुए, जबकि तमिलनाडु में यह आंकड़ा 684 और दिल्ली 122 के साथ आठवें नंबर पर है।
235 मरीजों में धड़क रहा दूसरे का दिल
साल 2016 में 235 मरीजों के दिल का प्रत्यारोपण हुआ। तमिलनाडु (100), केरल (18), महाराष्ट्र (34), तेलंगाना-आंध्र प्रदेश (33), दिल्ली (18), कर्नाटक (04) और गुजरात में सात मरीजों का प्रत्यारोपण किया है।
दिल्ली में पैनक्रियाज और फेफड़ा प्रत्यारोपण नहीं
तमिलनाडु और महाराष्ट्र जहां पैनक्रियाज और फेफड़ा प्रत्यारोपण कर रहे हैं। वहीं देश की राजधानी दिल्ली में अब तक यह प्रत्यारोपण नहीं हुआ है। इन राज्यों में 2015 से यह सुविधा मरीजों को मिल रही है।
साल दर साल बढ़ रहे दाता
साल दाता
2013 313
2014 411
2015 573
2016 807
2017 920 (लगभग)