पचास साल पुराने आयकर कानून के मसौदे को फिर से तैयार करने के लिए गठित की गई समिति इसकी भाषा को सरल बनाएगी। साथ ही समिति समय-समय पर किए संशोधनों के कारण जटिल हो गए नियमों और कई व्याख्याओं वाले नियमों को भी आसान बनाएगी। यह बात बुधवार केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) सदस्य तथा समिति के प्रमुख अखिलेश रंजन ने कही। उन्होंने कहा कि इस कदम का मकसद अनुपालन को प्रोत्साहित करना तथा कर निश्चितता को सुनिश्चित करना है।
रंजन ने एक कार्यक्रम में कहा कि कर कानून ऐसा होना चाहिए जो आसानी से समझ में आ जाए, मौजूदा कानून में कुछ मामलों में भाषा जटिल हो गई है। कई जगह बार-बार अतिरिक्त संशोधन हुए हैं और उनमें विवरण पर विवरण जोड़े गए हैं, जिन्हें फिर से सरल करने के लिए प्रावधानों पर प्रावधान जोड़े गए हैं, जिनसे वह और जटिल हो गए हैं। रंजन ने आगे कहा कि हम केवल बदलाव के लिए भाषा में बदलाव की कोशिश नहीं कर रहे हैं। मेरा मानना है कि हमें कानून के जटिल भागों को आसानी से समझने के योग्य बनाने की ओर काम करना चाहिए।
इससे अनुपालन को बढ़ावा मिलेगा और कर निश्चितता आएगी। कार्यबल 50 साल पुराने आयकर कानून के मसौदे को फिर से तैयार कर रहा है और इस संदर्भ में समिति अपनी रिपोर्ट 28 फरवरी, 2019 तक देगी। समिति की सिफारिशों को 2019-20 के पूर्ण बजट में शामिल किया जाएगा, जो अगले साल होने वाले आम चुनावों के बाद पेश किया जाएगा। एजेंसी
फर्जी निवेश पर रिफंड पर लगाम
आयकर विभाग ने फर्जी तरीके से लिए जाने वाले रिफंड पर नकेल कसना शुरू कर दिया है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के चेयरमैन सुशील चंद्रा ने यह जानकारी दी। मुंबई, बंगलूरू और पंजाब के कुछ हिस्सों में जांच में पता चला कि कुछ आयकर दाताओं से 80सी और हाउसिंग लोन के तहत फर्जी निवेश दिखा कर रिफंड के लिए प्रेरित किया जाता है।