इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के सचिव सुरेंद्र मेहता ने कहा कि भारत के लगभग 15 हजार ज्वैलर्स को नोटिस भेजकर कर की मांग की गई है। मेहता का अनुमान है कि रत्न और आभूषण क्षेत्र से जुड़े कारोबारियों से लगभग 50 हजार करोड़ रुपये की मांग की गई है। उन्होंने कहा, ‘दीर्घावधि में उद्योग को इससे समस्या हो सकती है, क्योंकि अपील के वास्ते 20 फीसदी जमा करने पर उन्हें सोना-चांदी या आभूषण खरीदने के लिए कर्ज लेना पड़ सकता है।’
उद्योग के लिए बढ़ेगा संकट
सुरेंद्र मेहता ने कहा, अगर वे मुकदमे हार जाते हैं तो ज्वैलर्स को कर्ज पर डिफॉल्ट करना पड़ सकता है, जिसका संभावित तौर पर आपूर्तिकर्ताओं पर बैंकरों पर भी असर पड़ेगा। कर अधिकारी अपने अधिकारों के भीतर पिछले राजस्व पर कर्ज की मांग कर रहे हैं, जिसकी जांच में समय लगता है लेकिन अधिकारियों के लिए कर के रूप में पूरे राजस्व की मांग करना एक असामान्य बात है।
दो वरिष्ठ कर अधिकारियों ने कहा कि विभाग ने इस साल ज्वैलर्स सहित हजारों लोगों को नोटिस भेजे हैं, जिनके माध्यम से अनुमानित तौर पर डेढ़ से दो लाख करोड़ रुपये तक की कर मांग की गई है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड और वित्त मंत्रालय ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की और सरकार की तरफ से ज्वैलर्स से की गई मांग पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
घटा राजस्व तो आई नोटबंदी की याद
कई वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि मोदी सरकार की इस पहल का उद्देश्य राजस्व बढ़ाना है, क्योंकि भारत की अर्थव्यवस्था लगभग 11 साल के निचले स्तर पर पहुंचती दिख रही है। चालू वर्ष में भारत का कंपनी कर और आयकर संग्रह में लगभग दो दशक में पहली बार गिरावट आने का अनुमान है।