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मोदी से मुकाबले के लिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी काफी हैं

Thu, 04 May 2017 03:54 PM IST
शशिधर पाठक/नई दिल्ली
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सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा
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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से राजनीतिक मुकाबले के लिए कांग्रेस अद्यक्ष सोनिया गांधी काफी हैं। फिलहाल कांग्रेस अध्यक्ष राष्ट्रपति चुनाव के लिए विपक्ष के साझा उम्मीदवार को खड़ा करने की अगुआई कर रही हैं। कांग्रेस पार्टी के रणनीतिकारों को उम्मीद है कि राष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया पूरी होते-होते तेजी से तस्वीर बदलने लगेगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा का ग्राफ तेजी से नीचे उतरेगा और आगामी राज्यों के चुनाव में सत्ता पक्ष को मुंह की खानी पड़ेगी।
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बुधवार को कांग्रेस अध्यक्ष से उमर अब्दुल्ला ने भेंट की।  इस दौरान देश के राजनीतिक हालात, कश्मीर समस्या समेत तमाम मुद्दों पर चर्चा हुई। माना जा रहा है कि दोनों उमर अब्दुल्ला के साथ राष्ट्रपति चुनाव पर भी चर्चा हुई है। जल्द ही इस संदर्भ में कांग्रेस अध्यक्ष फारुख अब्दुल्ला से भी चर्चा करेंगी। सोनिया गांधी मुलायम सिंह यादव, लालू प्रसाद यादव से भी बात की है। तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी, एनसीपी प्रमुख शरद पवार का मन टटोला है। वहीं बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार से राष्ट्रपति चुनाव, विपक्ष की रणनीति, भावी राजनीतिक दिशा समेत कई मुद्दों पर कांग्रेस अध्यक्ष विवस्तार से चर्चा कर चुकी है। वामदलों ने पहले ही कांग्रेस की अगुआई को स्वीकार कर लिया है। सीताराम येचुरी, शरद यादव इसके पक्षधर है।

सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस अध्यक्ष ने मौजूदा चुनौती को स्वीकार करते हुए क्षेत्रीय दलों से संपर्क तेज करने की रणनीति बनाई है। इस क्रम में नवीन पटनायक से भी चर्चा चल रही है। बसपा सुप्रीमों मायावती के वह संपर्क में हैं। सूत्र बताते हैं कि जल्द ही डीएमके नेता एमके स्टालिन और ममता बनर्जी दिल्ली आने वाले हैं। उनकी इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष से भेंट होगी।
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राहुल गांधी सेकेन्ड्री की भूमिका में

राहुल गांधी - फोटो : pti
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी लगातार सक्रिय हैं। उमर अब्दुल्ला, एमके स्टालिन, सीताराम येचुरी, नीतिश कुमार समेत तमाम नेताओं के वह संपर्क में हैं। राहुल गांधी शरद पवार से भी बात की है लेकिन वह कांग्रेस अध्यक्ष के प्रतिनिधि की भूमिका में हैं। माना यह जा रहा है कि कांग्रेस पार्टी राष्ट्रपति चुनाव के जरिए विपक्षी एकता का आभामंडल करना चाहती है। कांग्रेस पार्टी चाहती है कि यह एकता संसद में भी बनी रहे। ताकि धर्मनिरपेक्ष ताकतों का असर दिखाई दे। पार्टी ने इसके लिए अपने रुख में बदलाव लाने, आम सहमति को वरीयता देने का मन बनाया है।

तीन साल के कामकाज पर होगा प्रहार
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम, एके एंटनी, कपिल सिब्बल समेत अन्य पार्टी की रणनीति में बदलाव के पक्षधर हैं। रणनीतिकार चाहते हैं कि पार्टी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की छवि से लडऩे के बजाय तीन साल की सरकार के कामकाज और उसकी नीतियों को केन्द्र में रखकर राजनीतिक लड़ाई लड़े। सूत्र बताते हैं कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार,शरद यादव, एनसीपी के शरद पवार, माकपा के सीताराम येचुरी भी इसी के पक्षधर है। ऐसे में विपक्ष केन्द्र सरकार के तीन साल पूरे होने पर उससे सवाल पूछले, संतुलित रहकर आक्रामक तरीके से नीतियों को कठघरे में खड़ा करने की तैयारी में है।

फिर भी सोनिया बड़ा चेहरा
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की तबियत ठीक नहीं रहती, लेकिन विपक्ष के साथ-साथ पार्टी  नेताओं का मानना है कि वह राजनीति का बड़ा चेहरा हैं। ऐसे सोनिया को आगे रखकर राजनीतिक लड़ाई को जोरदार धार दी जा सकती है। इससे राहुल गांधी की छवि को भी आघात लगने से बचाया जा सकेगा। दूसरे सोनिया गांधी की अगुआई में विपक्षी दलों के नेताओं को साथ लाने, राजनीतिक ताकत बनने में भी मदद मिलेगी।
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