यौन उत्पीड़न से जुड़ी एक शिकायत पर सुनवाई करते हुए मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि अगर दफ्तर में बॉस काम न करने या अयोग्यता के कारण भेदभाव करता है, तो महिलाएं यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज नहीं कर सकतीं। अदालत ने अपने फैसले में कहा, किसी महिला कर्मचारी से गुस्से में इस्तेमाल की गई भाषा का मतलब यौन उत्पीड़न नहीं होता।
हाईकोर्ट ने ट्रेडमार्क और जीआई के डिप्टी रजिस्ट्रार वी नटराजन के खिलाफ केंद्रीय प्रशासनिक ट्रिब्यूनल (कैट) द्वारा दिए गए आदेश को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा, ‘हर दफ्तर को अपना शिष्टाचार बनाए रखना पड़ता है। किसी ऑफिस के प्रमुख के पास महिला या पुरुष कर्मचारी से काम लेने के लिए अपना विवेक और विशेषाधिकार है। महिलाएं वुमन एट वर्कप्लेस (प्रिवेंशन, प्रोहिबिशन एंड रिड्रेशल) एक्ट, 2013 का गलत उपयोग नहीं कर सकतीं। मामला 2 दिसंबर, 2013 की एक शिकायत से जुड़ा है। इसमें एक महिला ने नटराजन पर मनमानी और उसके आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया था। यह शिकायत ट्रेडमार्क एंड जीआई के रजिस्ट्रार और कंट्रोलर जनरल के पास दर्ज कराई गई थी।
रजिस्ट्रार ने यौन उत्पीड़न के मामले में एक आंतरिक समिति का गठन किया था। इसके बाद महिला ने नटराजन के खराब व्यवहार की अन्य घटनाओं को शामिल कर एक दूसरी शिकायत दर्ज कराई थी। फिर महिला ने तमिलनाडु महिला आयोग में शिकायत दर्ज कराते हुए कहा था आंतरिक समिति उसे न्याय नहीं दे सकती। तब डिस्ट्रिक्ट सोशल वेलफेयर ऑफिसर ने मामले में जांच की थी और प्राथमिक तौर पर केस दर्ज किया था। बाद में यह मामला कैट से होते हुए हाईकोर्ट पहुंचा था।