बदली हुई वैश्विक परिस्थितियों में भारत संयुक्त राष्ट्र में स्थाई सदस्यता और आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर पर शिंकजा कसने की नए सिरे से रणनीति बनाएगा। सरकारी सूत्रों ने यह जानकारी दी है।
सूत्रों के मुताबिक यूएन की स्थाई सदस्यता के लिए भारत स्थाई सदस्यों के साथ ही साधारण सदस्यों के साथ नए सिरे से बातचीत का सिलसिला शुरू करेगा। यही नहीं जैश-ए-मोहम्मद पर संयुक्त राष्ट्र में प्रतिबंध लगाने के लिए भी भारत नए सिरे से प्रयास करेगा।
इस मामले में चीन पर चौतरफा दबाव बनाने के लिए भारत की कोशिश ब्रिक्स की तरह अन्य वैश्विक मंचों पर पाक के आतंकी संगठनों को घेरने की भी होगी। नई रणनीति की शुरुआत रविवार से शुरू हुए यूएन की 72वीं आमसभा से होगी।
सूत्रों के मुताबिक, यूएन आमसभा में शिकरत करने गईं विदेश मंत्री सुषमा स्वराज कई अहम देशों के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगी। उनके एजेंडे में मसूद पर प्रतिबंध और यूएन की स्थाई सदस्यता मसले पर विभिन्न देशों की रजामंदी हासिल करना शामिल होगा।
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एनएसजी की राह में चीन है बड़ा रोड़ा
परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में भारत के प्रवेश पर वीटो लगाने वाला चीन ही यूएन में भारत की स्थाई सदस्यता हासिल करने की राह का सबसे बड़ा रोड़ा है। भारत के सामने स्थाई सदस्यता हासिल करने का विकल्प तो है, मगर इसके एवज में उसे वीटो का अधिकार नहीं मिलेगा। भारत नहीं चाहता कि वीटो के अधिकार के बिना वह यूएन की स्थाई सदस्यता स्वीकार करे।
बदली वैश्विक परिस्थितियां भारत के पक्ष में
विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, इस साल कूटनीतिक स्तर पर वैश्विक परिस्थितियों में तेजी से बदलाव हुए हैं जिनमें से कई भारत के पक्ष में जा रही हैं। चीन को छोड़ कर संयुक्त राष्ट्र के सभी स्थाई सदस्य भारत का साथ निभाने का वादा कर चुकेहैं। अधिकारी ने कहा कि हमारे सामने मुख्य चुनौती यह है कि इस राह की सबसे बड़ी बाधा चीन से कैसे निपटा जाए।