अमर उजाला शब्द सम्मान के दूसरे संस्करण में शनिवार को मुंबई में फिल्मकार और कवि गुलजार ने देश के हालात पर और आम आदमी के दर्द पर व्यंग्नात्मक टिप्पणी करते हुए जोर देकर कहा कि आज के दौर में साहित्यकार ही सीधे-साफ तरीके से सच्ची बात कह पा रही है।
समारोह में हिंदी के प्रख्यात कथाकार और संपादक ज्ञानरंजन और मराठी के विख्यात कवि और उपन्यासकार भालचंद्र नेमाडे को सर्वोच्च आकाशदीप अलंकरण से सम्मानित किया गया। इसके तहत उन्हें पांच-पांच लाख की नकद राशि और प्रतीक चिन्ह अर्पित किए गए।
अमर उजाला शब्द सम्मान-2019 के तहत इसी मौके पर पांच अन्य हिंदी साहित्यकारों, ज्ञान चतुर्वेदी, गगन गिल, सुनीता बुद्धिराजा, अंबर पांडेय और उत्पल बैनर्जी को भी गुलजार ने प्रतीक चिह्न के साथ एक-एक लाख रुपये की राशि अर्पित की गई।
गुलजार ने मुंबई आकर आयोजन करने के लिए अमर उजाला को बधाई दी। अमर उजाला की इस विशेष पहल पर भालचंद्र नेमाडे ने भी पत्रसमूह को विशेष आभार प्रकट किया।
हम रेत में चल रहे हैं, कहीं पहुंच नहीं रहे
आकाशदीप से सम्मानित ज्ञानरंजन ने कहा कि हमारे देश का वर्तमान हिंसक है। हम समय के माहिर और समय के उस्तादों से घिर गए हैं। हम रेत में चल रहे हैं, हमारे पैर चल रहे हैं, हम कहीं पहुंच नहीं रहे।
मेरा पाठक वो जो वंचित है, मगर जिंदगी से प्यार करता है
आकाशदीप से ही सम्मानित भालचंद्र नेमाडे ने अपने जीवन दर्शन को दोहराते हुए कहा कि मेरे सामने वो पाठक होता है, जो ग्रामीण है, जरूरी सुविधाओं से वंचित है, मेहनतकश है, असहाय है मगर जिंदगी से प्यार करता है, जिसका दिल धड़कता है। उन्होंने हिंदी के बारे में कहा कि मेरी बंबइया हिंदी है, जो हम सबकी बोली है, वही सच्चे अर्थ में राष्ट्रभाषा है।