सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के पीछे बड़ी साजिश की जांच कर रही सीबीआई के नेतृत्व वाली बहु अनुशासकीय निगरानी तंत्र (एमडीएमए) को चार हफ्ते के भीतर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।
जस्टिस एल नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि, एमडीएमए की रिपोर्ट एक वर्ष पुरानी है और उस वक्त कई देशों को भेजे गए लेटर रोगेटरी (एलआर) पर जवाब आना बाकी था। पीठ ने एमडीएमए की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल पिंकी आनंद को स्टेटस रिपोर्ट में श्रीलंका, थाईलैंड सहित अन्य देशों के भेजे गए एलआर के बारे में भी जिक्र करने के लिए कहा है।
मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने एमडीएमए को पूर्व प्रधानमंत्री की हत्या के पीछे की साजिश का पता लगाने के लिए कहा था। एमडीएमए में सीबीआई समेत कई केंद्रीय एजेंसियों के विशेषज्ञ हैं। दिसंबर, 1998 में सरकारी आदेश के तहत इसका गठन किया गया था। 21 मई, 1991 को राजीव गांधी की हत्या की गई थी।
यह मसला तब उठा था जब वकील गोपाल शंकर नारायण ने कहा था कि एमडीएमए की रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं है कि किस तरह बम बना, किसने बम बनाया और किसने इसे उपलब्ध कराया? नारायण के मुवक्किल एजी पेरारीवलन को राजीव गांधी हत्याकांड में बम में इस्तेमाल होने वाली दो बैटरी मुहैया कराने का दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। गोपाल शंकर नारायण ने पेरारीवलन की दोषसिद्धि को चुनौती देते हुए कहा था कि बम बनाने की साजिश संबंधी रिपोर्ट से उसकी बेगुनाही साबित हो जाएगी।