देश के प्रमुख 9 शहरों में इस साल जनवरी से जून की अवधि में 33 फीसदी ज्यादा घरों की डिलीवरी हुई। डिलीवरी में ये तेजी पिछले साल मई में लागू हुए रियल एस्टेट कानून (रेरा) की वजह से आई है। रियल एस्टेट कंसल्टेंट कंपनी प्रॉपटाइगर ने अपनी एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी है।
प्रॉपटाइगर ने दावा किया है कि 2017 में जनवरी से जून के बीच बिल्डरों ने 1,44,654 खरीदारों को घर बनाकर सौंपे थे, जबकि इस साल यह संख्या बढ़कर 1,93,061 हो गई है। घरों की डिलीवरी में सबसे ज्यादा वृद्धि नोएडा में हुई है। यहां 171 फीसदी घरों की डिलीवरी में वृद्धि हुई है, जबकि मुंबई में 85 फीसदी डिलीवरी बढ़ी है। हालांकि चेन्नई और पुणे में क्रमश: 28 फीसदी और 8 फीसदी घरों की डिलीवरी घटी है।
प्रॉपटाइगर ने अपनी रिपोर्ट में ये भी दावा किया है कि 2019 के अंत तक बिल्डर 8.6 लाख घरों की डिलीवरी करेंगे। कंपनी के मुख्य निवेश अधिकारी ने बताया कि रेरा कानून लागू होने के बाद बिल्डर नये हाउसिंग प्रोजेक्ट लाने के बजाय पुराने बचे हुए प्रोजेक्ट को पूरा करने में लगे हुए हैं। दरअसल, ऐसा वो इसलिए कर रहे हैं कि क्योंकि रेरा कानून के मुताबिक प्रोजेक्ट में देरी करने पर उनके ऊपर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि रेरा कानून के आ जाने से लोगों को घरों की खरीदारी पर भी विश्वास बढ़ा है और इसीलिए घरों की बिक्री में भी तेजी आई है। उन्होंने कहा कि आने वाले त्योहारी सीजन में घरों की बिक्री बढ़ सकती है। कंपनी के सर्वे के मुताबिक ग्रेटर नोएडा, यमुना एक्सप्रेस-वे, नवी मुंबई, ठाणे, गुरुग्राम, भिवाड़ी, धारूहेड़ा और सोहना में घरों की बिक्री में तेजी आ सकती है।
रेरा कानून के मुताबिक, बिल्डर और घर खरीदार दोनों के लिए पेनाल्टी पर एक समान ब्याज का नियम है, जबकि पहले बिल्डर खरीदार से मनमाना ब्याज वसूलते थे। इसके अलावा रेरा ने कानून में ये भी प्रावधान किया है कि बिल्डर किसी एक प्रोजेक्ट का पैसा अलग खाते में रखेंगे, जबकि पहले बिल्डर अपना प्रोजेक्ट बढ़ाने के लिए एक का पैसा दूसरे में लगा देते थे और इस कारण प्रोजेक्ट में काफी देरी होती थी, जिससे ग्राहकों को परेशानी झेलनी पड़ती थी और उन्हें अपना पैसा वापस लेने के लिए सालों-साल इंतजार करना पड़ता था। लेकिन अब नये नियम के मुताबिक, ग्राहक बिल्डरों के प्रोजेक्ट में देरी होने पर प्रोजेक्ट से बाहर निकल सकते हैं। उन्हें उनका पूरा पैसा वापस कर दिया जाएगा और अगर बिल्डर पैसा वापस देने में देरी करते हैं तो ग्राहकों को उसका ब्याज भी मिलेगा।
रेरा के कारण 25 फीसदी बढ़ी घरों की बिक्री
ये रेरा कानून का ही असर है कि इस साल पहली छमाही में घरों की बिक्री में 25 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। आरबीआई ब्याज दरों में 0.5 फीसदी की बढ़ोतरी भी कर चुकी है, लेकिन इसके बावजूद घरों की डिमांड लगातार बढ़ रही है। प्रॉपर्टी कंसल्टेंसी जेएलएल इंडिया ने अपनी एक रिपोर्ट में ये जानकारी दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल पहली छमाही में रियल एस्टेट के क्षेत्र में 24,000 करोड़ रुपये का निवेश हुआ है।