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एक ट्रेन गुजरने के बाद 60 मिनट तक खाली रहेगा रेल ट्रैक, भारतीय रेलवे के पीपीपी मॉडल की खूबी

Wed, 12 Aug 2020 10:34 PM IST
Rajeev Rai जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
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भारतीय रेल (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
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पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के तहत 109 क्लस्टर रूट पर जो निजी ट्रेनें चलेंगी, रेलवे द्वारा उनकी रूपरेखा तैयार की जा रही है। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने से पहले रेलवे उन सभी रूटों पर ट्रायल करेगा। खास बात है कि इनमें कई व्यस्त रूट भी हैं। सूत्रों का कहना है कि पीपीपी मॉडल पर दौड़ने वाली ट्रेनों का टाइम टेबल नए सिरे से बनाया जाएगा। एक ट्रेन गुजरने के बाद कम से कम साठ मिनट तक वह रूट खाली रखना होगा। ऐसा इसलिए किया जाएगा ताकि ट्रेन का संचालन कर रही कंपनी को नुकसान न हो। अगर उसी ट्रैक पर कुछ ही देर में दूसरी ट्रेन आती है तो यात्री पीपीपी मॉडल वाली ट्रेन में नहीं बैठेंगे।

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दिल्ली मंडल के एक रेलवे अधिकारी के मुताबिक, तेजस एक्सप्रेस की तर्ज पर 151 निजी ट्रेन चलाई जाएंगी। इस प्रक्रिया पर रेलवे ने काम शुरू कर दिया है। रेलवे ने इसके लिए 109 रूटों का चयन किया है। इन रूटों पर भी कई तरह के बदलाव किए जा रहे हैं। चूंकि इन रूटों पर ट्रेन में केवल ड्राइवर और गार्ड ही रेलवे के होंगे, बाकी स्टाफ निजी कंपनी का रहेगा। प्राइवेट कंपनी ही टिकट बुक करेगी और टीटी भी उसी कंपनी के रहेंगे। अभी जो व्यवस्था है, उसमें एक ट्रेन के 15 मिनट बाद भी दूसरी गाड़ी आ सकती है। सर्दियों के मौसम में जब धुंध पड़ती है तो उस वक्त एक ही ट्रैक पर कई गाड़ियां आगे पीछे होती हैं। साथ ही एक एक्सप्रेस गाड़ी जाने के थोड़ी देर बाद पेसेंजर या मेल आ जाती है। ट्रेन में भीड़ भी रहती है। बहुत से यात्री सोचते हैं कि पीछे आ रही दूसरी गाड़ी में बैठ जाएंगे। लेकिन पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप योजना में यह सब नहीं होगा। चूंकि यहां पर केवल फायदा देखा जाएगा, इसलिए पीछे आ रही ट्रेनों का समय बदलना पड़ेगा। 

देश में पीपीपी मॉडल पर चलने वाली प्राइवेट ट्रेनों में यात्री किराया महंगा होगा, इस बाबत रेलवे बोर्ड के चेयरमैन विनोद कुमार यादव का कहना था कि अभी सिर्फ पांच फीसदी अतिरिक्त ट्रेनों का ही परिचालन प्राइवेट ऑपरेटर्स को दिया जा रहा है। बाकी बची 95 फीसदी ट्रेनों का परिचालन भारतीय रेलवे ही करेगा। नई व्यवस्था में भले ही प्रतिस्पर्धा रहेगी, मगर प्राइवेट ट्रेन ऑपरेटर मनमर्जी से यात्रा किराया तय नहीं कर सकेंगे। एसी बसों और हवाईजहाजों के मुकाबले में किराया ज्यादा नहीं होगा। 

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