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नए साल में अरविंद केजरीवाल के सामने होगी ये बड़ी चुनौती, कितना काम आएगा दिल्ली मॉडल

Fri, 01 Jan 2021 10:04 PM IST
योगेश साहू अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली।
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अरविंद केजरीवाल सिंघु बॉर्डर पहुंचे - फोटो : एएनआई
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उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में अगले वर्ष के प्रारंभ में फरवरी-मार्च में चुनाव होने हैं। आम आदमी पार्टी ने इन तीनों ही राज्यों में इस बार अपनी मजबूत दावेदारी पेश करने का फैसला किया है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में पार्टी ने अरविंद केजरीवाल के 'दिल्ली मॉडल' को भुनाने की कोशिशें शुरू कर दी हैं तो पंजाब में पार्टी का पूरा दांव किसानों के मुद्दे पर केंद्रित है।

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अरविंद केजरीवाल ने तीनों ही राज्यों में चुनावी अभियान संभालने की जिम्मेदारी अपने विश्वस्त संजय सिंह, मनीष सिसोदिया और राघव चड्ढा को सौंपी है। वहीं, आतिशी मार्लेना एक जनवरी को ही गुजरात पहुंच रही हैं। वे वहां सुंदरकांड के आयोजन में भाग लेने के बाद गुजरात चुनावों के लिए पार्टी उम्मीदवारों की घोषणा भी करेंगी।

नए साल (2021) के पहले ही दिन आम आदमी पार्टी ने अपने इरादे जाहिर कर दिए हैं। पहली जनवरी को ही मनीष सिसोदिया ने उत्तराखंड के शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक को पत्र लिखकर राज्य में किए गए कामकाज पर खुली बहस की चुनौती दी है। पार्टी इसके पहले उत्तर प्रदेश में भी इसी तरह की बहस आयोजित कराना चाहती थी। संजय सिंह और मनीष सिसोदिया की कई बार की कोशिशों के बाद भी लखनऊ में इस तरह की कोई बहस नहीं हो पाई। 
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पार्टी नेता संजय सिंह के मुताबिक, दिल्ली में अरविंद केजरीवाल सरकार ने पूरे देश में शासन का एक नया मॉडल स्थापित किया है। दिल्ली की गरीब जनता को बिजली, पानी, परिवहन की मुफ्त सुविधाएं दी गई हैं। शिक्षा-स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकार ने अभूतपूर्व काम किया है।

गरीबों ने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि उनके बच्चों को कभी इस तरह की सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। केजरीवाल के पहले इस तरह के शासन की लोग कल्पना भी नहीं किया करते थे। उन्होंने कहा कि अब हम इसी मॉडल को पूरे देश में लागू करने की कोशिश कर रहे हैं।

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क्या आप को इसमें सफलता मिल सकेगी? 

इस सवाल पर पार्टी नेता कहते हैं कि दिल्ली में भी पहले भाजपा-कांग्रेस जैसी पार्टियों की परंपरागत राजनीति ही चलती थी, लेकिन जब आम आदमी पार्टी ने लोगों में भरोसा जगाया तो जनता ने उन्हें यह अवसर दिया। अब हमारे पास एक ऐसा मॉडल है जिसे पूरा देश और पूरी दुनिया देख रही है। इसके सहारे अब हम जनता में आसानी से भरोसा जगा सकते हैं।

भाजपा का दावा- नहीं मिलेगी सफलता
भारतीय जनता पार्टी की उत्तराखंड प्रवक्ता नेहा जोशी ने अमर उजाला से कहा कि आम आदमी पार्टी को दिल्ली में सफलता मिलने का एक बड़ा कारण कांग्रेस सरकार का भ्रष्टाचार था। छोटा और शहरी राज्य होने के नाते पार्टी ने आसानी से अपना आधार बनाया, जबकि अन्य राज्यों में राजनीतिक चुनौतियां कहीं ज्यादा कठिन हैं।

यही कारण है कि आम आदमी पार्टी को दिल्ली छोड़ पूरे देश में कहीं भी सफलता नहीं मिली। उत्तराखंड में वे पहले भी अपनी किस्मत आजमा चुके हैं। लेकिन उन्हें कामयाबी नहीं मिली। इस बार भी उनकी कोशिश कामयाब नहीं होने वाली है।

नेहा जोशी बताती हैं कि उत्तराखंड की जनता राजनीतिक रूप से कहीं ज्यादा परिपक्व है। वे किसी भी ऐसे व्यक्ति या दल को महत्व नहीं देते जो उनकी महत्वाकांक्षाओं को पूरा नहीं करता। उत्तराखंड क्रांति दल ने राज्य के गठन में अच्छी भूमिका निभाई थी, लेकिन बाद में लोगों ने देखा कि पार्टी राजनीतिक रूप से उनकी सोच को मूर्त रूप देने में असफल साबित हो रही है।

उसके बाद लोगों ने उसे महत्व देना बंद कर दिया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में आम आदमी पार्टी का भी यही हाल होगा। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश और गुजरात में भी राजनीतिक चुनौतियां कहीं ज्यादा कठिन हैं। उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा की मजबूत जातिगत उपस्थिति के अलावा भाजपा ने 2014 के बाद राज्य में अपनी जड़ें मजबूत की हैं। ऐसे में आप की यहां बड़ी सफलता की उम्मीद करना फलदायी नहीं लगता। 

बीजेपी नेता खेमचंद शर्मा ने कहा कि उत्तर प्रदेश में आम आदमी पार्टी की राजनीति सफल नहीं हो सकती। यहां राजनीतिक सफलता मुफ्त की घोषणाएं करने से नहीं होने वाली है। बल्कि इससे ज्यादा लोग पार्टी की वैचारिक निष्ठा को महत्व देते हैं जो अरविंद केजरीवाल अब तक स्थापित नहीं कर सके हैं। उनकी अब तक की राजनीति लोकलुभावन नीतियों की ही रही है जिसके सहारे उत्तर प्रदेश में सफलता की उम्मीद नहीं की जा सकती। 
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