उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में अगले वर्ष के प्रारंभ में फरवरी-मार्च में चुनाव होने हैं। आम आदमी पार्टी ने इन तीनों ही राज्यों में इस बार अपनी मजबूत दावेदारी पेश करने का फैसला किया है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में पार्टी ने अरविंद केजरीवाल के 'दिल्ली मॉडल' को भुनाने की कोशिशें शुरू कर दी हैं तो पंजाब में पार्टी का पूरा दांव किसानों के मुद्दे पर केंद्रित है।
अरविंद केजरीवाल ने तीनों ही राज्यों में चुनावी अभियान संभालने की जिम्मेदारी अपने विश्वस्त संजय सिंह, मनीष सिसोदिया और राघव चड्ढा को सौंपी है। वहीं, आतिशी मार्लेना एक जनवरी को ही गुजरात पहुंच रही हैं। वे वहां सुंदरकांड के आयोजन में भाग लेने के बाद गुजरात चुनावों के लिए पार्टी उम्मीदवारों की घोषणा भी करेंगी।
नए साल (2021) के पहले ही दिन आम आदमी पार्टी ने अपने इरादे जाहिर कर दिए हैं। पहली जनवरी को ही मनीष सिसोदिया ने उत्तराखंड के शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक को पत्र लिखकर राज्य में किए गए कामकाज पर खुली बहस की चुनौती दी है। पार्टी इसके पहले उत्तर प्रदेश में भी इसी तरह की बहस आयोजित कराना चाहती थी। संजय सिंह और मनीष सिसोदिया की कई बार की कोशिशों के बाद भी लखनऊ में इस तरह की कोई बहस नहीं हो पाई।
पार्टी नेता संजय सिंह के मुताबिक, दिल्ली में अरविंद केजरीवाल सरकार ने पूरे देश में शासन का एक नया मॉडल स्थापित किया है। दिल्ली की गरीब जनता को बिजली, पानी, परिवहन की मुफ्त सुविधाएं दी गई हैं। शिक्षा-स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकार ने अभूतपूर्व काम किया है।
गरीबों ने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि उनके बच्चों को कभी इस तरह की सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। केजरीवाल के पहले इस तरह के शासन की लोग कल्पना भी नहीं किया करते थे। उन्होंने कहा कि अब हम इसी मॉडल को पूरे देश में लागू करने की कोशिश कर रहे हैं।