उद्धव ठाकरे के तेवर से बेचैनी
बीते पांच साल तक शिवसेना के दबाव से बेपरवाह भाजपा की अब बेचैनी बढ़ गई है। औसत प्रदर्शन के बावजूद भाजपा की मजबूरियों को भांपते हुए शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने सत्ता के लिए 50-50 फार्मॅूला अपनाने पर जोर दिया है। दबाव बढ़ाने के लिए शिवसेना ने इस फॉर्मूले के तहत पहले ढाई साल की सत्ता पर भी अपना दावा ठोक दिया है।
भाजपा की मुश्किल यह है कि कांग्रेस-एनसीपी को 100 के करीब सीटों पर जीत मिली है, जो शिवसेना के साथ मिलकर आसानी से बहुमत का आंकड़ा पार कर लेता है। जाहिर तौर पर भाजपा के प्रस्ताव ना मानने की स्थिति में शिवसेना एनसीपी-कांग्रेस के साथ जाने का संदेश देकर दबाव बनाएगी। भाजपा की योजना पहले की तरह सरकार चलाने और ढाई साल बाद शिवसेना का सीएम बनाने का प्रस्ताव देने की है।
चार महीने में ही बदल गई परिस्थिति
चार महीने पहले हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा-शिवसेना गठबंधन को 288 विधानसभा क्षेत्रों में से 224 पर बढ़त हासिल हुई थी। विधानसभा चुनाव में यह घटकर 159 रह गई। गठबंधन के मत प्रतिशत में भी करीब 10 फीसदी की कमी आई है।