मध्यप्रदेश के कई जिलों में बच्चे जिस हालत में पढ़ने को मजबूर हैं उससे राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। एक तरफ राज्य के शिक्षा मंत्री व्यवस्था को लेकर बड़े वायदे कर रहे हैं, दूसरी तरफ बच्चों के पास स्कूल नहीं है उन्हें खुले में पढ़ता पड़ता है। मुरैना जिले से ऐसा ही मामला सामने आया है, जहां करीब 69 स्कूल ऐसे हैं, जहां बच्चों को बिना छत के स्कूल में पढ़ाई करनी पड़ रही है।
नवीन शाक्या प्राथमिक विद्यालय ने पूरी कहानी बयां की है, जहां मौसम खराब हो जाने पर बच्चों को गाय और भैंस के तबेले में शिफ्ट होना पड़ता है। 2011 में स्थापित हुए इस स्कूल के बच्चों को अक्सर खुले में ही पढ़ना पड़ता है। स्कूल के टीचर कमलेश वर्मा बताते हैं कि उन्होंने बच्चों की सुरक्षा की सुरक्षा पर सवाल उठाया और कई बार प्रशासन से संपर्क साधने की कोशिश की, लेकिन हालात वैसे ही बने हुए हैं।
बच्चे यहां पेड़ों की छाव में पढ़ते हैं, लेकिन धूप और बारिश ज्यादा हो जाने की वजह से परेशानियां ज्यादा बढ़ जाती हैं। वर्मा ने कहा कि गांव वालों की मदद से थोड़ी राहत मिल जाती है, लेकिन ऐसा कब तक चलेगा?