राज्यसभा में शुक्रवार को जद(यू) के गुलाम रसूल बलियासी ने झारखंड में अल्पसंख्यक मजदूरों के साथ दुर्व्यवहार का मुद्दा उठाया। जैसे ही संसदीय कार्य राज्यमंत्री और अल्पसंख्यक मामलों के राज्यमंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने जवाब दिया, पूरा सदन हंगामे में तब्दील हो गया। अल्पसंख्यक मामलों की मंत्री नजमा हेपतुल्ला ने भी पक्ष रखा लेकिन विपक्षी सदस्य इतने से संतुष्ट नहीं हुए।
कांग्रेस, जद(यू) के सदस्य वेल में आकर नारेबाजी करने लगे। इस मामले में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद, शरद यादव और माकपा के सीताराम येचुरी ने भी मोर्चा संभाला। अंत में विपक्ष ने संसदीय समिति को वहां भेजे जाने तथा सदन में अपनी रिपोर्ट सौंपने का प्रस्ताव रखा, जिसे उपसभापति ने सभापति के पास अनुमति के लिए भेजने का आश्वासन देते हुए सदन की कार्यवाही 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
सांसद गुलाम रसूल ने झारखंड के नवादा में अल्पसंख्यकों के साथ दुर्व्यवहार और दो लोगों को पेड़ पर टांग कर फांसी देने की बात बताई। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार मामले में कोई कार्यवाही नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि इससे अल्पसंख्यक समुदाय खुद को बहुत असुरक्षित महसूस कर रहा है। इस पर मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि सदस्य जो कह रहे हैं, उसमें कितनी सच्चाई है इसको लेकर राज्यसरकार से बात करेंगे। नकवी के इतना कहते ही विपक्षी सदस्य आक्रामक हो गए।
इसके बाद गुलाम नबी आजाद ने कहा कि रसूल का कहना सही है। इस मुद्दे पर उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा था। आजाद ने कहा कि इसके बाद भी अफसोस की बात है कि अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री इस तरह का बयान दे रहे हैं। इस पर नजमा ने स्थिति को संभालने प्रयास करते हुए सीएम को पत्र लिखने का आश्वासन दिया। दूसरी तरफ नकवी उपसभापति से देश में सांप्रदायिक माहौल को लेकर संक्षिप्त चर्चा की मांग करने लगे।
नकवी के बोल सुनकर उपसभापति ने कहा कि सदन के सदस्य जो भी बात कह रहे हैं, उसे सत्ता पक्ष को गौर सुनना चाहिए। लेकिन तब तक विपक्षी नेता सदन वेल में आ चुके थे और नारेबाजी करने लगे।