वर्ष 2014 लोकसभा चुनाव के दो प्रमुख वादे निर्मल गंगा और रोजगार सृजन के मामले में संतोषजनक प्रगति न होने से नाराज प्रधानमंत्री ने न सिर्फ इन मंत्रालयों से जुड़ी टीम को ही बदल दिया है, बल्कि नई टीम में सबसे काबिल और भरोसेमंद मंत्रियों को मैदान में उतारा है।
अगले लोकसभा चुनाव में इन दो मुद्दों के तूल पकड़ने की आहट से सतर्क प्रधानमंत्री ने इससे जुड़े एक मंत्री राजीव प्रताप रूडी की विदाई कर दी तो संघ के हस्तक्षेप के बावजूद उमा भारती का मंत्रालय बदल दिया। प्रधानमंत्री हर हाल में निर्मल गंगा और रोजगार के मोर्चे पर अगले लोकसभा चुनाव तक लोगों को बड़ा बदलाव का अहसास दिलाना चाहते हैं।
पढ़ें: कैबिनेट में फेरबदल पर बोले जेटली- हर मंत्री और मंत्रालय पर है PM मोदी की निगरानी
दरअसल मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल के लिए माथापच्ची बढ़ने का एक बड़ा कारण इन्हीं दोनों मंत्रालयों के लिए बेहतर चेहरे की तलाश पूरी न हो पाना था। गौरतलब है कि अंतिम विमर्श में जहां प्रधानमंत्री ने निर्मल गंगा अभियान को पटरी पर लाने के लिए अपने वरिष्ठ मंत्री नितिन गडकरी से शनिवार को अपने आवास पर एक घंटे तक चर्चा की, वहीं कौशल विकास के संदर्भ में खुद पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने धर्मेंद्र प्रधान के साथ मैराथन बैठक की।
पढ़ें: कैबिनेट में हुआ फेरबदल, जानिए किसे मिला कौन-सा मंत्रालय
इन विमर्शों के बाद दोनों ही मंत्रालयों के लिए नई टीम की रूपरेखा तैयार हुई। दरअसल मंत्रालय से छुट्टी होने के संकेत के बाद संघ ने उमा भारती का बचाव किया था। इसका निष्कर्ष यह निकला की उमा मंत्रिमंडल में तो बनी रहीं लेकिन अपना मंत्रालय नहीं बचा पाई।