फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अंडमान में विदेशियों ने 44 बार किया उल्लंघन, यहां जाने के लिए अब लेनी होगी इजाजत

Thu, 29 Nov 2018 01:08 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
अंडमान के आदिवासी
विज्ञापन

अमेरिकी नागरिक की अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के उत्तरी सेंटिनल द्वीप पर हुई हत्या के बाद प्रशासन को यहां बसे आदिवासियों की सुरक्षा की याद आई है। यहां एक बार फिर से प्रतिबंधित क्षेत्र परमिट (आरएपी) को लागू किया जा सकता है। जो बिना इजाजत के लोगों को प्रतिबंधित स्थानों पर जाने से रोकता है। केंद्र सरकार को पता चला है कि हाल के समय में यहां विदेशियों ने 44 बार कानून का उल्लंघन किया है। 

विज्ञापन


इसी बीच 4 दिसंबर को राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (एनसीएसटी) के सदस्यों का एक प्रतिनिधिमंडल केंद्र शासित प्रदेश अंडमान रवाना होगा ताकि वहां की परिस्थिति का जायजा लिया जा सके। कुछ हफ्ते पहले अमेरिकी नागरिक जॉन एलन चाउ की यहां सेंटिनेलीज जाति ने हत्या कर दी थी। गृह मंत्रालय को अंडमान और निकोबार द्वीप समूह प्रशासन की घटना के संबंध में एक रिपोर्ट मिली है। यह जानकारी गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने दी।

अधिकारी ने कहा कि कुछ और द्वीपों के साथ ही नॉर्थ सेंटिनेल द्वीप में आरएपी को दोबारा लागू किया जा सकता है। उत्तरी सेंटिनेल अंडमान के उन 29 द्वीपों में से एक है जहां जाने के लिए जून तक विदेशियों को आरएपी लेनी पड़ेगी। यदि आरएपी को हटा लिया जाता है तो भी पर्यटक को वन विभाग और अंडमान के प्रशासन से इजाजत लेनी होगी क्योंकि यह स्थान दो कानूनों के तहत संरक्षित किया गया है। 
विज्ञापन


केंद्रीय गृह मंत्रालय को पता चला है कि अंडमान में विदेशी पर्यटकों द्वारा 44 बार नियमों और विनियमों का उल्लंघन किया गया है। दूसरे अधिकारी ने कहा, 'हालांकि इनमें से कोई भी मामला आरएपी से संबंधित नहीं है।' एनसीएसटी के अध्यक्ष नंद कुमार के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल दिसंबर की शुरुआत में अंडमान जाएगा। घटना से संबंधित रिपोर्ट को गृह मंत्रालय ने एनसीएसटी को भी सौंपा है।

एनसीएसटी का दल हालात की समीक्षा करके छह दिसंबर को वहां से चेन्नई जाएगा। कुमार ने बताया कि वहां के हालातों पर उन्होंने अंडमान प्रशासन और गृह मंत्रालय से रिपोर्ट मांगी थी। बुधवार को आयोग की बैठक में उन रिपोर्ट्स की समीक्षा की गई और वहां जाने का फैसला लिया गया। आयोग के मुताबिक आदिवासी मामलों के मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में 30 द्वीपों को प्रतिबंधित क्षेत्र परमिट हटाने के फैसले की पृष्ठभूमि के बारे में आयोग को अवगत कराया।

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें