जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के जिस कैंपस में नौ फरवरी को देश को तोड़ने और देश विरोधी नारे लगे थे, वहीं अब 23 अगस्त तक हर दिन तिरंगा फहराने के साथ-साथ राष्ट्रगान की धूम रहेगी।
लाल दुर्ग में छात्रों को अब आजादी के साथ तिरंगे का सम्मान करना भी अनिवार्य होगा। खास बात यह है कि जश्न-ए-आजादी से पहले जेएनयू समेत देशभर के केंद्रीय समेत राज्यों के विश्वविद्यालयों में छात्रों को 1857 की क्रांति से लेकर हिंदुस्तान की आजादी, शहीदों की शहादत से छात्रों को रूबरू करवाने के लिए देशभक्ति पर आधारित प्रतियोगिताएं भी आयोजित करवानी होंगी।
नौ फरवरी की घटना से सबक लेते हुए मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने पहली बार जेएनयू समेत देशभर के विश्वविद्यालयों में 23 अगस्त तक छात्रों को स्वतंत्रता संग्राम से जोड़ने की योजना तैयार की है, जिसे आजादी-70 याद करो कुर्बानी का नाम दिया गया है।
मंत्रालय ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग और ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन के माध्यम से इंजीनियरिंग, मेडिकल, आर्किटेक्चर समेत अन्य विश्वविद्यालयों में स्वतंत्रता दिवस पर कार्यक्रम आयोजित करने का निर्देश दिया है।
छात्रों को जोड़ने के लिए स्वतंत्रता दिवस दौड़ भी आयोजित की जानी है। विश्वविद्यालयों समेत कॉलेजों को कार्यक्रम से संबंधित फोटो और जानकारी मंत्रालय की वेबसाइट और फेसबुक पर आजादी के लिए विशेष रूप से डिजाइन आजादी -70 पेज पर भी अपलोड करना अनिवार्य है।
विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में इन पंद्रह दिनों में राष्ट्रगान का आयोजन करना अनिवार्य है। इस दौरान तिरंगा भी फहराया जाएगा। विश्वविद्यालयों को कहा गया है कि यदि आपके परिसर के आसपास स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े ऐतिहासिक स्थल हैं तो छात्रों का दौरा कराएं।
छात्रों को पंद्रह वैकल्पिक प्रतियोगिताएं दी गयी हैं, जिसमें से एक को चुनना अनिवार्य किया गया है। छात्र स्वतंत्रता दिवस पर आधारित ग्रीटिंग कार्ड बना सकते हैं, जिसे बाद में भारत सीमा बार्डर पर तैनात देश के प्रहरियों को भेजा जाएगा। पौधरोपण अभियान से पर्यावरण बचाने का संदेश देना भी शामिल है।
इस दौरान विश्वविद्यालयों में वाद-विवाद या परिचर्चा का आयोजन किया जा सकता है, जिसमें स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी हस्तियों या फिर विशेषज्ञों को बुलाकर 1857 -1947 तक के संघर्ष और आजादी से जुड़ी जानकारियों को छात्रों से साझा किया जा सके।
इसके अलावा आजादी पर देश की रक्षा करने वाली तीनों सेनाओं आर्मी, एयरफोर्स या नेवी के अधिकारियों को भी बुलाया जा सकता है। वहीं, चित्रकारी, निबंध, नाटक,स्लोगन, देशभक्ति गाने, वर्कशॉप, सेमिनार, संगीतमय संध्या शामिल हैं।